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Shri Krishna 20 June Episode 49 : श्रीकृष्‍ण सुनते हैं राम वनगमन और दशरथ वियोग की कथा

Updated: शनिवार, 20 जून 2020 (13:20 IST)
निर्माता और निर्देशक रामानंद सागर के श्रीकृष्णा धारावाहिक के 20 जून के 49वें एपिसोड ( Shree Krishna Episode 49 ) में श्रीकृष्‍ण और बलराम को सांदीपनि ऋषि राम कथा सुना रहे हैं। पिछले एपिसोड में उन्होंने राम भगवान के स्वयंवर, उनके राज्याभिषेक की घोषणा और कैकेयी के कोपभवन में जाने तक की कथा सुनाई थी। अब आगे।
 
रामानंद सागर के श्री कृष्णा में जो कहानी नहीं मिलेगी वह स्पेशल पेज पर जाकर पढ़ें...वेबदुनिया श्री कृष्णा
 
 
वहां राजा दशरथ आते हैं तो वह उनको देवासुर संग्राम में उनका साथ देने के एवज में वह बताती है कि आपने मुझे कई भी दो वर मांगने का कहा था। राजा दशरथ कहते हैं बस इतनी सी बात है तो मांग लो कोई भी दो वर। तब कैकेयी राजा दशरत से अपने दो वरों में पहला भरत को अयोध्या का राज बनाना और दूसरा राम को 14 बरस का वनवास मांग लेती हैं।
 
यह सुनकर महाराज दशरथ अवाक् रह जाते हैं और कैकेयी को भलाबुरा कहते हुए विलाप करते हैं और दुख मैं डूब जाते हैं तभी वहां श्रीराम आ जाते हैं। कैकेयी से पूछते हैं कि पिता की दशा ऐसी क्यों है? राम कहते हैं कि आप मुझे आज्ञा दें माता कि मैं आपके और आपने पिता के लिए क्या कर सकता हूं जिससे आपका और उनका दुख दूर हो जाए। 
 
यह सुनकर कैकेयी बताती है कि तुम्हारे पिता के सामने मेरे दो वरों के कारण धर्मसंकट खड़ा हो गया है। फिर कैकेयी वह दोनों वर राम को बता देती हैं तो राम कहते हैं बस इतनी सी बात पर इतना विवाद था। भरत को राज्य देने के लिए तो मुझे किसी की आज्ञा की आवश्यकता नहीं। उस जैसे भाई को तो मैं राज्य स्वयं प्रसन्नता से दे दूंगा। रहा वनगमन तो लगता है कि मेरे कोई पुण्य जाग उठे हैं जो आपकी आज्ञा से मुझे वहां जाने का अवसर मिल रहा है जहां महान ऋषि और मुनि रहते हैं। मां मेरा तो चारों ओर से कल्याण हो गया। पिता की आज्ञा का पालन, मां की इच्छा का अनुकरण, छोटे भाई का राज्याभिषेक और मुनि दर्शन से मेरा कल्याण हो जाएगा।
 
लक्ष्मण को यह पता चलता है तो वह बहुत ही क्रोधित हो जाते हैं और वे राम के लिए अपने पिता और भरत से भी युद्ध करने को आतुर हो जाते हैं, लेकिन राम उन्हें समझाते हैं। 
 
फिर राम, लक्ष्मण और सीता के वनगमन की विदाई बताई जाती है। विदाई की इस घड़ी में दशरथ सहित समूचा राज्य भावुक हो उठता है और सभी उन्हें रोकने का प्रयास करते हैं लेकिन तीनों रथ पर सवार होकर निकल जाते हैं। राजा दशरथ रोते हुए कैकेयी का परित्याग कर देते हैं।
 
फिर सांदीपनि ऋषि बताते हैं कि श्रीराम अपने सखा निशादराज के साथ गंगा नदी को पार करने के बाद
 प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज ऋषि का आश्रम पहुंचते हैं। फिर वे यमुना नदी पार करने के बाद चित्रकूट की ओर चले जाते हैं।
 
श्रीराम के जाने के बाद महाराज दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। प्राण त्यागने के पहले दशरथ बताते हैं कि मैंने श्रवण कुमार को भूलवश तीर से मार दिया था जिसके चलते उनमी मां सदमें में मर गई थी। इसके बाद उनके पिता ने श्राप दिया था कि जिस तरह मैं पुत्र वियोग में तड़प-तड़प कर मर रहा हूं उसी तरह तू भी पुत्र वियोग में तड़प-तड़प कर मरेगा।
 
फिर सांदीपनि ऋषि बताते हैं कि इस धरती पर भगवान राम अवतार के दो मुख्य प्रयोजन थे। पहला यह कि वे मानव मर्यादा के ऐसे उच्चतम आदर्श स्थापित करना चाहते थे जो युगों युगों तक मानव जाति को प्रेम, बलिदान और सभ्यता के पथ पर चलना सिखाएं। उन्हें अपने धर्म का पालन करते हुए कर्तव्य पालन की शिक्षा दें। यहां तक की कथा का उनका यही प्रयोजन‍ सिद्ध होता है जिसके कारण वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। अब में रामावतार के दूसरे मुख्य प्रयोजन अर्थात रावण के विनाश की कथा संक्षेप में सुनाता हूं। जय श्रीकृष्ण।
 
रामानंद सागर के श्री कृष्णा में जो कहानी नहीं मिलेगी वह स्पेशल पेज पर जाकर पढ़ें...वेबदुनिया श्री कृष्णा
 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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