Hanuman Chalisa

Shri krishna : कृष्ण ने अपना आखिरी संवाद माता पार्वती से किया था

Updated: गुरुवार, 11 जून 2020 (08:12 IST)
ये कृष्ण के जीवन की रहस्यमयी बात है। असल में कृष्ण ने अपना आखिरी संवाद पार्वती से किया था। जब कृष्ण को पैर में वाण लग गया तब सभी देवता और शिव पार्वती उनसे मिलने उनके पास आए थे। सबकी स्तुति के बाद और अपने जाने से पहले कृष्ण ने आखिरी बार बाँसुरी बजाई थी, तब उनकी बाँसुरी से सारा संसार और सारे देवता, यहाँ तक की शिव भी मोहित होकर सो गए थे। लेकिन पार्वती जागती रहीं थीं।
 
पार्वती ने कृष्ण से अपने और उनके(कृष्ण के) अद्वैत का मंडन किया था। जैसे शिव और कृष्ण में एकत्व है वैसे ही पार्वती भी कृष्ण का ही रूप हैं। पुराने समय में पार्वती ने सभी देवताओं के अंश से जन्म लेकर महिसासुर का वध किया था। 
 
दुर्गमासुर का वध करने के कारण उनका नाम दुर्गा पड़ा। उन्होंने ही आदि में दक्ष की कन्या के रूप में जन्म लिया था और फिर हिमवान की पुत्री के रूप में वही प्रकट हुई थीं। उन्होंने हर जन्म में शिव को ही प्राप्त किया था। अपनी कृष्णभक्ति के कारण ही पार्वती शिव की अर्धांगिनी बन सकीं थीं।
 
पार्वती ने कृष्ण से जल्दी ही गोलोक जाने का अनुरोध किया जहाँ राधा बेचैन होकर उनकी प्रतीक्षा कर रही थीं। पार्वती ने अपने और राधा के अद्वैत के बारे में भी बताया।
 
उस समय कृष्ण ने दो रूप धारण किए, चतुर्भुज रूप बैकुंठ में चला गया और  द्विभुज रूप उसी प्रकार गोलोक में चला गया। पार्वती भी शिव के साथ कैलाश चलीं गई।

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 15 सितंबर 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को दूसरे दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

जैन धर्म के संवत्सरी पर्व का महत्व और मिच्छामी दुक्कड़म् का अर्थ

गणेश चतुर्थी पर जानिए गणपति जी के 5 चमत्कारी मंदिर के बारे में रोचक जानकारी

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को पहले दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

अगला लेख