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श्रावण मास में रविवार का खास उपाय, 11वें दिन इस मंत्र का जाप करने से प्रसन्न होंगे शिवजी और सूर्यदेव

Updated: शनिवार, 8 अगस्त 2026 (17:41 IST)
सावन का महीना पूर्णतः भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है, लेकिन जब सावन का कोई दिन रविवार को पड़ता है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व दोगुना हो जाता है। ज्योतिष और शास्त्रों में सूर्यदेव को भगवान शिव का ही प्रत्यक्ष स्वरूप (शिव-सूर्य) माना गया है। सावन के 11वें दिन (रविवार) को शिवजी की उपासना के साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और तेज की प्राप्ति होती है।
 

1. रविवार को जाप करने योग्य विशेष मंत्र

रविवार को शिवजी और सूर्यदेव दोनों का आशीर्वाद एक साथ पाने के लिए नीचे दिए गए प्रभावी मंत्रों का जाप करें:
शिव-सूर्य का संयुक्त महामंत्र (सर्वोत्तम)
"ॐ नमः शिवाय सूर्याय नमः"
या
"ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः, ॐ नमः शिवाय"
 

भगवान शिव को प्रसन्न करने का मंत्र

आरोग्य और भयमुक्ति के लिए (महामृत्युंजय मंत्र):
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
 

सरल शिव पंचाक्षर मंत्र:

"ॐ नमः शिवाय"
 

सूर्यदेव को प्रसन्न करने के मंत्र

सूर्य गायत्री मंत्र (तेज व बुद्धि हेतु):
"ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥"
 
सूर्य अर्घ्य मंत्र:
"ॐ घृणिः सूर्याय नमः"
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2. सावन रविवार की विशेष पूजा विधि

सूर्यदेव को अर्घ्य दान और प्रातःकाल का नियम: 
रविवार को सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान के बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। उसमें थोड़ा सा लाल चंदन, कुमकुम, गुड़ और लाल फूल मिलाएं। इसके बाद सूर्यदेव को ॐ घृणिः सूर्याय नमः बोलते हुए जल अर्पित करें।
 

2. शिवलिंग का जलाभिषेक

शिवालय में पूजन: अर्घ्य देने के बाद शिवालय जाएं या घर के मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करें। जल में थोड़ा सा गंगाजल और गुड़ मिलाकर अर्पित करने से सूर्य-चंद्र दोनों ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
 
लाल चंदन व बेलपत्र अर्पित करें: शिवजी को लाल चंदन का तिलक लगाएं और 11 बेलपत्रों पर चंदन से ॐ लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही आंकड़े (आकड़ा) के फूल अर्पित करना इस दिन बेहद शुभ माना जाता है।
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रुद्राक्ष की माला से जाप

मंत्र जाप: पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और रुद्राक्ष की माला से ऊपर बताए गए शिव-सूर्य मंत्र का कम से कम 108 बार (1 माला) स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करें।
 

आरती और सात्विक दान

आरती व दान: अंत में शिव जी और सूर्यदेव की आरती करें। पूजा के बाद किसी जरूरतमंद को गुड़, तांबे का बर्तन, गेहूं या लाल वस्त्र का दान करें।
 

3. सावन के रविवार का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व

  • आरोग्य और कांति: सावन में शिव पूजा से जहां मानसिक शांति मिलती है, वहीं रविवार को सूर्य पूजन से आंखों की रोशनी, हड्डियों की समस्या और शारीरिक कमजोरी दूर होती है।
  • पितृ दोष और सूर्य दोष से मुक्ति: यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या पितृ दोष है, तो सावन के रविवार को भगवान शिव पर जल में गुड़ मिलाकर चढ़ाने से यह दोष शांत होता है।
  • मान-सम्मान में वृद्धि: जो लोग नौकरी, प्रतियोगिता परीक्षा या प्रशासनिक सेवा में सफलता पाना चाहते हैं, उनके लिए सावन का रविवार अत्यंत फलदायी माना गया है।

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