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श्रावण मास में शिव भक्ति से मिलेगी शनि कष्टों से मुक्ति

Updated: गुरुवार, 9 जुलाई 2020 (17:41 IST)
श्रावण मास में मंदिर जाकर शिव परिवार की धूप, दीप, नेवैद्य, फल और फूलों आदि से पूजा करके सारा दिन उपवास करें। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाकर उनका दूध से अभिषेक करें। शाम को मीठा भोजन करें। अगले दिन भगवान शिव के पूजन के पश्चात यथाशक्ति दान आदि देकर ही व्रत का पारण करें। 
 
अपने किए गए संकल्प के अनुसार व्रत करके उनका विधिवत उद्यापन किया जाना चाहिए। जो लोग सच्चे भाव एवं नियम से भगवान की पूजा, स्तुति करते हैं वह मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। इन व्रतों में सफेद वस्त्र धारण करके सफेद चंदन का तिलक लगाकर ही पूजन करना चाहिए तथा सफेद वस्तुओं के दान की ही सर्वाधिक महिमा है। 
 
दान करने वाली वस्तुएं- बर्फी, सफेद चंदन, चावल, चांदी, मिश्री, गाय का घी, दूध, दही, खीर, सफेद पुष्पों का दान सायंकाल में करने से जहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वहीं घर में खुशहाली भी आती है।
 
क्या खाएं- खीर, पूरी, दूध, दही, चावल। इस व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए।
 
किस मंत्र का करें जाप- 'ॐ नम: शिवाय' एवं 'महामृत्युंजय' मंत्र के अतिरिक्त चंद्र बीज मंत्र ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:’ और चंद्र मूलमंत्र ‘ॐ चं चन्द्रमसे नम:’।
 
व्रत से मिलने वाले लाभ- मानसिक सुख एवं शांति का शरीर में प्रवाह होगा। व्यापार में वृद्धि होगी, परिवार में खुशहाली आएगी। जिस कामना से व्रत किया जाएगा, वह अवश्य पूरी होगी। आप शनि के प्रकोप से पीड़ित हैं तो इस श्रावण माह में सच्चे मन से शिवजी से अपनी पीड़ा कहें। इससे वह आपकी पीड़ा जरूर सुनेंगे और उसे दूर करेंगे। 
 
शिव शनि के कष्टों से दिलाएंगे मुक्ति- 
 
यदि जन्मकुंडली में शनि, राहु, केतु व अन्य कष्टकारी ग्रह शारीरिक कष्ट इत्यादि दे रहे हैं तो आपको श्रावण में शिव पूजा प्रारंभ कर देनी चाहिए और पूरे माह शिवजी का पूजन करना चाहिए।
 
धनु, वृश्चिक और मकर राशि वाले शनि की साढ़ेसाती से परेशान हैं तो,श्रावण में रुद्राभिषेक अवश्य करें और शिवलिंग के सामने बैठकर शनि के बीज मंत्र का जप करें। इसके अलावा उन्‍हें सुंदरकांड का पाठ भी करना चाहिए। 
लेखक के बारे में
आचार्य राजेश कुमार
दिव्यांश ज्योतिष केंद्र, लखनऊ.... और पढ़ें

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