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क्या कहती है शिव महापुराण की कोटिरुद्र संहिता

Updated: गुरुवार, 4 अगस्त 2016 (15:18 IST)
कोटिरुद्र संहिता में शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है। ये ज्योतिर्लिंग सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल में मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी में महाकालेश्वर, ओंकारेेश्वर में ममलेश्वर,हिमालय में केदारनाथ, डाकिनी में भीमेश्वर, काशी में विश्वनाथ, गौतमी तट पर त्र्यम्बकेश्वर, परल्यां में वैद्यनाथ, सेतुबंध में रामेश्वर, दारूक वन में नागेश्वर और शिवालय में घुश्मेश्वर हैं। 
इसी संहिता में विष्णु द्वारा शिव के सहस्त्र नामों का वर्णन भी है। साथ ही शिवरात्रि व्रत के माहात्म्य के संदर्भ में व्याघ्र और सत्यवादी मृग परिवार की कथा भी है। भगवान 'केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग' के दर्शन के बाद बद्रीनाथ में भगवान नर-नारायण का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है। इसी आशय की महिमा को 'शिवपुराण' के 'कोटिरुद्र संहिता' में भी व्यक्त किया गया है-
 
तस्यैव रूपं दृष्ट्वा च सर्वपापै: प्रमुच्यते।
जीवन्मक्तो भवेत् सोऽपि यो गतो बदरीबने।।
दृष्ट्वा रूपं नरस्यैव तथा नारायणस्य च।
केदारेश्वरनाम्नश्च मुक्तिभागी न संशय:।।

 
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12 ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा 

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