sundarkand

क्या श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मुक्ति या मोक्ष मिल जाता है? 4 रहस्य

Updated: शनिवार, 21 सितम्बर 2019 (13:55 IST)
मुक्ति और मोक्ष में फर्क है। मुक्ति से बढ़कर है मोक्ष। मोक्ष को प्राप्त करना आसान नहीं है। जब कोई व्यक्ति अपने मृतकों का श्राद्ध करता है तो वह उसकी मुक्ति की कामना करता है। मुक्ति एक साधारण शब्द है। श्राद्ध कर्म मुक्ति कर्म है। यह क्यों किया जाता है और क्या इससे मुक्ति मिलती है?

 
1.अतृप्तता क्या होती है?
जिसने अपना संपूर्ण जीवन जिया है और संसार के सभी कार्यों के करने के बाद भक्ति, ध्यान और पुण्य भी किया है वह देह छोड़ने के बाद संभवत: अतृप्त नहीं रहता है। पुराणों के अनुसार अतृप्त आत्माएं मुक्त नहीं हो पाती है। उदाहरणार्थ यह कि जब आप बगैर पानी पीए सो जाते हैं और यदि नींद में आपको प्यास लगती है तो आप सपने में कहीं जाकर पानी पी रहे होते हैं लेकिन कितना ही आप पानी पीएं आपकी उससे प्यास नहीं बुझती है। आप तृप्त नहीं होते हैं क्योंकि यह प्यास आपके भौतिक शरीर को लगी है सूक्ष्म शरीर को नहीं। मरने के बाद व्यक्ति की हालत ऐसी ही हो जाती है। वह अपनी आदतवश कार्य करता है, क्योंकि उसने खुद को कभी शरीर से भिन्न नहीं समझा है। ऐसे में देह छोड़ने के बाद आत्मा की उसके कर्मों के अनुसार उसे गति मिलती है।

ALSO READ: पितरों के समान हैं ये 3 वृक्ष, 3 पक्षी, 3 पशु और 3 जलचर
2.क्या है गति?
दरअसल, हिन्दू धर्म पुनर्जन्म में विश्वास रखता है। जब कोई आत्मा शरीर छोड़ती है तो वह दूसरा शरीर धारण करती है। यदि किसी को दूसरा शरीर समय के अनुसार नहीं मिलता है तो वह व्यक्ति प्रेत योनि में चला जाता है या अपने कर्मों के अनुसार देव और पितृलोक में से किसी एक लोक चला जाएगा। गरुड़ पुराण के अनुसार यदि उसने बुरे कर्म किए हैं तो वह नीचे के लोक अर्थात नरक में कुछ काल के लिए रहता है या चिरनिंद्रा में अनंतकाल के लिए सो जाता है।
 
 
मरने के बाद आत्मा की तीन तरह की गतियां होती हैं- 1. उर्ध्व गति, 2. स्थिर गति और 3. अधोगति। इसे ही अगति और गति में विभाजित किया गया है। 1. अगति : अगति में व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है उसे फिर से जन्म लेना पड़ता है। 2. गति : गति में जीव को किसी लोक में जाना पड़ता है। जैसे 1.ब्रह्मलोक, 2.देवलोक, 3.पितृलोक और 4.नर्कलोक।
 
अगति के चार प्रकार है- 1.क्षिणोदर्क, 2.भूमोदर्क, 3. अगति और 4.दुर्गति। क्षिणोदर्क अगति में जीव पुन: पुण्यात्मा के रूप में मृत्यु लोक में आता है और संतों सा जीवन जीता है। भूमोदर्क में वह सुखी और ऐश्वर्यशाली जीवन पाता है। अगति में नीच या पशु जीवन में चला जाता है। दुर्गति : गति में वह कीट, कीड़ों जैसा जीवन पाता है।
3.श्राद्ध कर्म से मिलती है सद्गति:
श्राद्धकर्ता चाहता है कि हमारे पूर्वजों को किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। अर्थात या तो वे देवलोक या पितृलोक में स्थित हो या पुनर्जन्न ले लें। वेद और पुराणों में श्राद्ध कर्म की मंत्र सहित कुछ ऐसी विधियां है जिससे कि मृतकों का आत्मबल विकसित होता है और उनका संताप मिट जाता है। संताप मिटने से ही उन्हें प्रेत यानि से मुक्ति मिलती है और वे सद्गति को प्राप्त करके या तो पितृलोक में स्थित हो जाते हैं या नया जन्म ले लेते हैं। श्राद्ध कर्म में मुक्ति का सिर्फ इतना ही अर्थ है।


ऐसा माना जाता है कि प्रयाग मुक्ति का पहला द्वार है, काशी दूसरा, गया तीसरा और अंतिम ब्रह्मकपाली है। यहां क्रम से जाकर पितरों के प्रति विधिवत किए गए श्राद्ध से मुक्ति मिल जाती है।

 
4.मोक्ष क्या है?
आत्मा जन्म एवं मृत्यु के निरंतर पुनरावर्तन की शिक्षात्मक प्रक्रिया से गुजरती हुई अपने पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है। जन्म और मत्यु का यह चक्र तब तक चलता रहता है, जब तक कि आत्मा मोक्ष प्राप्त नहीं कर लेती। मोक्ष प्राप्त करने का अर्थ है कि आपने अपने उस चक्र को तोड़ दिया जो कि प्रकृति द्वारा आपको दिया गया था। अब आप भौतिक जगत से परे रहकर खुद के अस्तित्व का अनुभव करते हुए आगे बढ़ गए हैं। अब आपका भविष्य किसी भी प्रकार के अतीत पर आधारित नहीं है।
 
 
आप प्रकृति से स्वतंत्र हैं। मतलब यह कि आपके पास पांचों इंद्रियां नहीं है लेकिन फिर भी आप वह सबकुछ कर सकते, सुन सकते, देख सकते और ग्रहण कर सकते हैं जो कि आप करना चहते हैं। सनातन धर्म में मोक्ष तक पहुंचने और ब्रह्मलोक में स्थित होने के सैंकड़ों मार्ग बताए गए हैं। 
 
मोक्ष को बौद्ध धर्म में निर्वाण, जैन धर्म में कैवल्य और योग में समाधि कहा गया है। मोक्ष एक ऐसी दशा है जिसे मनोदशा नहीं कह सकते। इस दशा में न मृत्यु का भय होता है न संसार की कोई चिंता। सिर्फ परम आनंद। परम होश। परम शक्तिशाली होने का अनुभव। मोक्ष समयातीत है जिसे समाधि कहा जाता है। अमृतनादोपनिषद में मोक्ष प्राप्त करने का सरल तरीका बताया गया है।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

बुध का कर्क राशि में प्रवेश: 12 राशियों पर क्या होगा असर? जानें किसकी चमकेगी किस्मत

04 August Birthday: आपको 04 अगस्त, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (4 अगस्‍त, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 04 अगस्‍त 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण: 100 साल बाद इस देश में दिन में छाएगा अंधेरा, जानिए कहां-कहां दिखेगा

अगला लेख