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श्राद्ध में कौए को क्यों माना जाता है पितर? जानिए 10 रहस्य

kawwa
भादौ महीने के 16 दिन कौआ हर घर की छत का मेहमान बनता है। ये 16 दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं। कौए एवं पीपल को पितृ प्रतीक माना जाता है। इन दिनों कौए को खाना खिलाकर एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है।
 
 
श्राद्ध में कौए या कौवे को छत पर जाकर अन्न जल देना बहुत ही पुण्य का कार्य है। माना जाता है कि हमारे पितृ कौए के रूप में आकर श्राद्ध का अन्न ग्रहण करते हैं। इस पक्ष में कौओं को भोजन कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है। आओ जानते हैं कौए के 10 रहस्यमयी तथ्य।
 
 
1.कौए को अतिथि-आगमन का सूचक और पितरों का आश्रम स्थल माना जाता है।
2.पुराणों की एक कथा के अनुसार इस पक्षी ने अमृत का स्वाद चख लिया था इसलिए मान्यता के अनुसार इस पक्षी की कभी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती। कोई बीमारी एवं वृद्धावस्था से भी इसकी मौत नहीं होती है। इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से ही होती है।
3.जिस दिन किसी कौए की मृत्यु हो जाती है उस दिन उसका कोई साथी भोजन नहीं करता है। कौआ अकेले में भी भोजन कभी नहीं खाता, वह किसी साथी के साथ ही मिल-बांटकर भोजन ग्रहण करता है।
4.कौए को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पहले से ही आभास हो जाता है।
6.शास्त्रों के अनुसार कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में स्थित होकर विचरण कर सकती है।
7.कौए को भोजन कराने से सभी तरह का पितृ और कालसर्प दोष दूर हो जाता है।
8.कौआ लगभग 20 इंच लंबा, गहरे काले रंग का पक्षी है जिसके नर और मादा एक ही जैसे होते हैं।
9.कौआ बगैर थके मीलों उड़ सकता है।
10.सफेद कौआ भी होता है लेकिन वह बहुत ही दुर्लभ है।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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