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अश्विन सर्वपितृ अमावस्या 2020 में श्राद्ध करने का मुहूर्त

Updated: बुधवार, 16 सितम्बर 2020 (12:30 IST)
सर्वपितृ अमावस्या पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि होती है। 15 दिन तक पितृ घर में विराजते हैं और हम उनकी सेवा करते हैं फिर उनकी विदाई का समय आता है। इसीलिए इसे 'पितृविसर्जनी अमावस्या', 'महालय समापन' या 'महालय विसर्जन' भी कहते हैं। अगर कोई श्राद्ध तिथि में किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। सर्वपितृ अमावस्या उन पितरों के लिए भी होती है जिनके बारे में आप नहीं जानते हैं। अत: सभी जाने और अनजाने पितरों हेतु इस दिन निश्चित ही श्राद्ध किया जाना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन सभी पितर आपके द्वार पर उपस्थित हो जाते हैं। आओ जानते हैं श्राद्ध करने का समय और मुहूर्त।
 
 
सर्वपितृ अमावस्या : सितंबर 16, 2020 को 19:58:17 से अमावस्या आरम्भ होकर सितंबर 17, 2020 को 16:31:32 पर समाप्त होगी।
 
कुपत, रोहिणी और अपराह्न काल में करते हैं श्राद्ध : विद्वान ज्योतिष मानते हैं कि श्राद्ध के 16 दिनों में कुपत, रोहिणी या अपराह्न काल में ही श्राद्ध कर्म करना चाहिये। ये कुपत काल दिन का आठवां मुहूर्त काल होता है। तारीख के अनुसार यह मुहूर्त हर दिन अलग अलग होता है। कुतप काल में किए गए दान का अक्षय फल मिलता है।
 
 
इस दिन क्या करें :
1. इस दिन तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज कराया जाता है।
2. इस दिन नित्य कर्म करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें।
3. इस दिन संध्या के समय दीपक जलाएं और पूड़ी व अन्य मिष्ठान उचित स्थान पर रखें। ऐसा इसलिए करना चाहिए ताकि पितृगण भूखे न जाएं और दीपक की रोशनी में पितरों को जाने का रास्ता दिखाएं।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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