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महाष्टमी : कोरोना लॉकडाउन में घर पर हवन कैसे करें

गुरुवार,अक्टूबर 22, 2020
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ऋग्वेद में स्वस्तिक के देवता सवृन्त का उल्लेख है। स्वस्तिक का आविष्कार आर्यों ने किया और पूरे विश्‍व में यह फैल गया। भारतीय संस्कृति में इसे बहुत ही शुभ कल्याणकारी और मंगलकारी माना गया है। स्वस्तिक शब्द को 'सु' और 'अस्ति' दोनों से मिलकर बना है। 'सु' ...
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कलश की स्थापना गृहप्रवेश, नवरात्रि पूजन, दीपावली पर लक्ष्मी पूजन, यज्ञ-अनुष्ठान और सभी तरह के मांगलिक कार्यों के शुभारंभ अवसर पर आदि के अवसर की जाती है। आओ जानते हैं इसकी पूजा घर में स्थापना करने के क्या है 3 फायदे।
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धूप कई प्रकार की होती है। तंत्रसार के अनुसार अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागरमाथा, चंदन, इलाइची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गुल ये सोलह प्रकार के धूप माने गए हैं। इसे षोडशांग धूप कहते हैं।
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शिव के मंदिर में सोमवार, विष्णु के मंदिर में रविवार, हनुमान के मंदिर में मंगलवार, शनि के मंदिर में शनिवार और दुर्गा के मंदिर में बुधवार और काली व लक्ष्मी के मंदिर में शुक्रवार को जाने का उल्लेख मिलता है। गुरुवार को गुरुओं का वार माना गया है। इस दिन ...
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व्रत रखने के नियम दुनिया को हिंदू धर्म की देन है। हिंदू धर्म में व्रत रखने के कई नियम है और इसका बहुत ही महत्व है। व्रत रखना एक पवित्र कर्म है और यदि इसे नियम पूर्वक नहीं किया जाता है तो न तो इसका कोई महत्व है और न ही लाभ अलबत्ता इससे नुकसान भी हो ...
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प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- (1) प्रार्थना, (2) ध्यान-साधना, (3) भजन-कीर्तन (4) यज्ञ और (5) पूजा-आरती। ...
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हिंदू धर्म में जीवन की हर हरकत, कर्म, संस्कार, रीति-रिवाज, दिनचर्या, समाज, रिश्ते, देश, समय, स्थान आदि को नियम, अनुशासन और धर्म से बांधा है। कहना चाहिए कि नियम ही धर्म है। पर्याप्त नींद लेना क्यों जरूरी है और सोते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए ...
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मंत्रयोग या जपयोग के चमत्कार के संबंध में शास्त्रों में ढेर सारे उल्ले‍ख मिलते हैं। वेदों में उल्लेख है कि विशेष प्रकार के मंत्रों से विशेष तरह की शक्ति उत्पन्न होती है। अनेक परिक्षणों से यह सिद्ध हो गया है कि मंत्रों में प्रयोग होने वाले शब्दों में ...
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हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान, स्थान विशेष या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। प्रदक्षिणा की प्रथा ...
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पांच तत्वों में से एक है जल। पुराणों में वर्णित है जल की महिमा का महत्व। शुद्ध जल और पवित्र जल में फर्क होता है। जीवन में दोनों का ही महत्व है। आओ जानते हैं कि पुराणों में जल का क्या महत्व है।
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प्राचीनकाल से ही लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं। हिन्दू शास्त्र और आयुरर्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। मीठा खाने के संबंध में तो आपको पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग नहीं जानते होंगे कि खाने के पहले तीखा या कहें कि चरका क्यों खाते हैं। आओ ...
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी के संबंध में 8 रहस्य।
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प्रत्येक माह में 2 चतुर्दशी और वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने का बहुत महत्व माना गया है। आओ जानते हैं इस तिथि की 5 खास बातें।
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क्या पितृदोष से हमें डरना चाहिए? क्या पितृदोष एक भयानक दोष है? इन सभी का जवाब है नहीं। नहीं क्यों? इसके कई कारण है। यदि आपके कर्म अच्छे हैं तो आपको किसी से भी डरने की जरूरत नहीं। किसी भी प्रकार के दोष निवारण करने की जरूरत नहीं। परंतु यदि आप गलत ...
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बहुत से हिन्दुओं के घरों में शालिग्राम होता है। यह शिवलिंग से मिलता-लता एक पत्थर होता है जो कि नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गंडकी नदी के तट पर ही पाया जाता है। शिवलिंग शिवजी तो शालिग्राम भगवान विष्णु का विग्रह रूप है। यह बहुत जाग्रत होते हैं। मान्यता है ...
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केले का पेड़ काफी पवित्र माना जाता है और कई धार्मिक कार्यों में इसका प्रयोग किया जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है। केले के पत्तों में प्रसाद बांटा जाता है। आओ जानते हैं केले की पूजा के 5 चमत्कारिक लाभ।
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भारतीय धर्म और संस्कृति में हाथी का बहुत ही महत्व है। हाथी को पूज्जनीय माना गया है। हाथी से जुड़े कई किस्से, कहानियां और पौराणिक कथाएं भारत में प्रचलित है। आओ जानते हैं कि हाथी क्यों है पूज्जनीय।
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भारत में अगरबत्ती का प्रचलन प्राचीनकाल से ही जारी है। प्रारंभ में अगरबत्ती की जगह धूप का प्रचलन था। भारत से यह प्रचलन मध्य एशिया, तिब्बत, चीन और जापान में गया। आओ जानते हैं अगरबत्ती के 5 फायदे और 5 नुकसान।
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प्रत्येक धर्म में धर्मग्रंथों का अत्यधिक महत्व होता है, और पवित्रता एवं सम्मान की दृष्टि से इन्हें पढ़ने के लिए समय और तरीका भी उतना ही महत्व रखता है। लेकिन धर्मग्रंथों को पढ़ने के लिए सुबह और शाम का समय ही सही माना जाता है। चलिए जानते हैं इसका ...
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