हिन्दू धर्म की 9 महत्वपूर्ण परिक्रमाएं

अनिरुद्ध जोशी|
परिक्रमा : ब्रज परिक्रमा को ही चौरासी कोस की परिक्रमा कहते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि इस परिक्रमा के करने वालों को एक-एक कदम पर अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। साथ ही जो व्यक्ति इस परिक्रमा को लगाता है, उस व्यक्ति को निश्चित ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 
यह परिक्रमा पुष्टि मार्गीयवैष्णवों के द्वारा मथुरा के विश्राम घाट से एवं अन्य संप्रदायों के द्वारा वृंदावन में यमुना पूजन से शुरू होती है। ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा लगभग 268 किलोमीटर अर्थात् 168 मील की होती है। इसकी समयावधि 20 से 45 दिन की है। परिक्रमा के दौरान तीर्थयात्री भजन गाते, संकीर्तन करते और ब्रज के प्रमुख मंदिरों व दर्शनीय स्थलों के दर्शन करते हुए समूचे ब्रज की बडी ही श्रद्धा के साथ परिक्रमा करते हैं।
 
कुछ परिक्रमा शुल्क लेकर, कुछ नि:शुल्क निकाली जाती हैं। एक दिन में लगभग 10-12 किलोमीटर की पैदल यात्रा की जाती है। परिक्रमार्थियों के भोजन व जलपान आदि की व्यवस्था परिक्रमा के साथ चलने वाले रसोडों में रहती है। परिक्रमा के कुल जमा 25 पड़ाव होते हैं। इस यात्रा को पैदल ही करने का महत्व है। परिक्रमा मार्ग में राधा-कृष्ण लीला स्थली, नैसर्गिक छटा से ओत-प्रोत वन-उपवन, कुंज-निकुंज, कुण्ड-सरोवर, मंदिर-देवालय आदि के दर्शन होते हैं। 
 
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