0

महमूद गजनवी ने इस तरह तोड़ा था सोमनाथ का मंदिर

शुक्रवार,मई 7, 2021
0
1
आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत काल का युद्ध 3137 ईसा पूर्व में हुआ था, अर्थात 5154 वर्ष पूर्व हुआ था। अंग्रेजों की खुदाई से माना जाता था कि 2600 ईसा पूर्व अर्थात आज से 4616 वर्ष पूर्व इस नगर सभ्यता की स्थापना हुई थी। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस सभ्यता ...
1
2
उज्जैन का प्राचीन नाम अवंतिका है। अवंतिका मालवा क्षेत्र का एक नगर है। मालवा वर्तमान मध्‍यप्रदेश राज्य का हिस्सा है। अवंतिका की गणना सप्तपुरियों में की जाती है। यहां ज्योतिर्लिंग के साथ ही शक्तिपीठ भी स्थापित है। पुण्य पवित्र नदी क्षिप्रा के तट पर ...
2
3
अविभाजित भारत के महान राजा दाहिर के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। राजा दाहिर ने बहुत कम समय तक के लिए शासन किया और वे शहीद हो गए। आओ जानते हैं राजा दाहिर के बारे में 10 खास बातें।
3
4
प्राचीन भारत में 400 से अधिक जनपद और 16 से अधिक महाजनपद थे। राम के काल 5114 ईसा पूर्व में नौ प्रमुख महाजनपद थे जिसके अंतर्गत उप जनपद होते थे। जैन 'हरिवंश पुराण' में प्राचीन भारत में 18 महाराज्य थे। पालि साहित्य के प्राचीनतम ग्रंथ 'अंगुत्तरनिकाय' में ...
4
4
5
हिन्दुस्तान के बाहर बलोचिस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, बर्मा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया और श्रीलंका में हिन्दू और बौद्ध धर्म से जुड़ी हजारों गुफाएं आज भी मौजूद है। हिन्दुस्तान में भी हजारों गुफाएं हैं। इन गुफाओं में ...
5
6
भारत में वैसे तो कई लड़ाईयां हुई लेकिन पानीपत की लड़ाई का जिक्र इतिहास में बहुत तरीकों से किया जाता रहा है। पानीपत की लड़ाई ऐसी थी जिसने भारत के इतिहास को बदलकर रख दिया था। दिल्ली के तख्त के लिए हुई पानीपत की लड़ाई के बारे में ऐसा कहते हैं कि इस ...
6
7
पहले ऐसा था कि किताबों में लिखे हुए इतिहास को सत्य माना जाता था परंतु फिर ऐसा दौर आया कि लिखे हुए इतिहास का पुरातात्विक अवशेष है तो उसे ही प्रामाणिक इतिहास माना जाएगा। यही कारण था कि अंग्रेजों के भारतीय इतिहास, पुराण आदि किताबों को जानबूझकर मिथक या ...
7
8
समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। दयानंदजी का जन्म 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। उनकी माता का नाम अमृतबाई और पिता का नाम अंबाशकर था। उन्होंने 1846, 21 वर्ष ...
8
8
9
मथुरा उत्तर प्रदेश जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। यमुना नदी के पश्चिमी तट पर बसा विश्व के प्राचीन शहरों में से एक मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। इस शहर का इतिहास बहुत ही पुराना है। यह शहर रामायण काल से ...
9
10
अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहां महल, मंदिर और तमाम तरह के आश्रम बने हुए थे। लेकिन गुलामी के काल में आक्रांतानों ने यह सभी तोड़ दिए थे। पुरातात्विक खुदाई और अवशेषों से अब यह सिद्ध हो चुका है कि रामलला जहां विराजमान है वहीं श्रीराम का जन्म ...
10
11
सम्राट चन्द्रगुप्त महान थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान कहा जाता है। सिकंदर के काल में हुए चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु चाणक्य थे। चन्द्रगुप्त ने अपने पुत्र बिंदुसार को ...
11
12
गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे सोमनाथ नामक विश्वप्रसिद्ध मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों से एक स्थापित है। पावन प्रभास क्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में विस्तार से ...
12
13
धरती पर ऐसे कई वंश हैं या लोग हैं जो कि अप्सराओं की संताने हैं। ये सभी अप्सराएं इंद्र के राज में रहती थी। हिमालय में कहीं पर इंद्र का राज हुआ करता था। इंद्र के आदेशानुसार समय-समय पर यह अप्सराएं मैदानी क्षेत्रों में आकर ऋषि मुनियों की तपस्या भंग करती ...
13
14
भारतीय इतिहास को दिल्ली पर ही केंद्रित रखे जाने के कारण भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के दिल्ली के राजाओं से कहीं अधिक महान राजाओं की गाथा को भुला दिया जाता है। उन्हीं में से एक है असम के आहोम राजा। प्राचीनकाल में असाम प्रागज्योतिषपुर का क्षेत्र ...
14
15
हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन की पूर्णिमा को होली का त्योहार मनाया जाता है। कहते हैं कि यह सबसे प्राचीन उत्सव में से एक है। हर काल में इस उत्सव की परंपरा और रंग बदलते रहे हैं। आओ जानते हैं इसका इतिहास।
15
16
भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते थे। वहीं रहकर वे कई जगह आकाश मार्ग से भ्रमण करते थे। इस दौरान विशेष परि‍स्थितियों में जहां भी उन्होंने धरती पर कदम रखे, वहां उनके पैरों के निशान बन गए। भारत में ऐसे कई निशान हैं। भगवान शिव के पैरों के निशान के दर्शन ...
16
17
तक्षशिला और पाटलीपुत्र के ध्वंस के बाद महाभारत युद्ध और बौद्ध काल के बीच के हिंदू इतिहास के अब बस खंडहर ही बचे हैं। इस धूमिल से इतिहास को इतिहासकारों ने खुदाईयों और ग्रंथों की खाक छानते हुए क्रमबद्ध करने का प्रयास किया है। हड़प्पा, सिंधु और ...
17
18
भद्राचल रामदास- 1620 में जन्मे और 1688 में ब्रह्मलीन भद्राचल रामदास का पूर्व नाम गोपन या गोपन्ना था। गोपन, अब्दुल हसन तान शाह के दरबार में तहसीलदार थे। उन्हें एक महिला के स्वप्न के आधार पर भद्रगिरि पर्वत से राम की मूर्तियां मिलीं। तब उन्होंने खम्माम ...
18
19
प्राचीन काल में ऐसी कई भाषाएं या उनकी लिपियां लुप्त होकर अब रहस्य का विषय बनी हुई है। भारत की इन लिपियों का रहस्य खुल जाए तो भारत के प्राचीन इतिहास का भी एक नया ही आयाम खुल सकता है। भारत में कई जगह ऐसी लिपियों में कुछ लिखा हुआ है जिन्हें अभी तक पढ़ा ...
19