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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती, जानिए 10 खास बातें

मंगलवार,नवंबर 17, 2020
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महाभारत के बाद बौद्ध काल के प्राचीन भारत में मगध और गांधार दो ऐसे सत्ता के केंद्र थे जहां से धर्म, राजनीति, शिक्षा और समाज की हर तर की गतिविधियां संचालित होती थी। महाभारत काल में 16 जनपद में मगध जनपद सबसे शक्तिशली जनपद था जिसका सम्राट जरासंध था। ...
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चौंसठ कलाओं में से एक चित्रकला का एक अंग है अल्पना। इसे ही मांडना भी कहते हैं और इसी का एक रूप है रंगोली। प्राचीन भारत में पहले दिवाली पर मांडना बनाए जाने का ही प्रचलन था परंतु अब रंगोली का प्रचलन ज्यादा है फिर भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ...
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दीपावली का त्योहार कब से मनाना प्रारंभ किया गया यह जानना बहुत जरूरी है। कई लोग कहेंगे कि रामायण काल में राम के अयोध्या आगमन के समय दीपावली मनाई गई थी तभी से यह त्योहार प्रचलन में है परंतु इस त्योहर से जुड़े और भी कई तथ्‍य हैं।
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भारतीय लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ऋषि मुनियोंकी संतानें हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश के कई पुत्र और पुत्रियां थी। इन सभी के पुत्रों और पुत्रियों से ही देव (सुर), दैत्य (असुर), दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, वानर, नाग, चारण, निषाद, मातंग, रीछ, ...
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मथुरा अंधक संघ की राजधानी थी और द्वारिका वृष्णियों की। ये दोनों ही यदुवंश की शाखाएं थीं। यदुवंश में अंधक, वृष्णि, माधव, यादव आदि वंश चला। श्रीकृष्ण वृष्णि वंश से थे। वृष्णि ही 'वार्ष्णेय' कहलाए, जो बाद में वैष्णव हो गए। भगवान श्रीकृष्ण के पूर्वज ...
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हमारे देश के ऐसे कई वीरों और वीरांगनाओं की दास्तान दबा दी गई जिन्होंने मुगल और अंग्रेजों से लड़कर विजयी प्राप्त की थी। उन्हीं में से एक थीं रानी दुर्गावती। दुर्गावती के वीरतापूर्ण चरित्र को भारतीय इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। सचमुच वह मां दुर्गा ...
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अयोध्या में राम मंदिर को बाबर के सेनापति मीर बाक़ी ने तुड़वा दिया था। म‍ं‍दिर तुड़वाने के बाद बाबरनामा के अनुसार 1528 में अयोध्या पड़ाव के दौरान बाबर ने मस्जिद निर्माण का आदेश दिया था। इसी तरह मथुरा के कृष्ण मंदिर और काशी के विश्‍वानाथ मंदिर को किसने ...
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अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या रामायण और महाभारत काल में भी मंदिर होते थे या कि वैदिक ऋषि अपने आश्रम में ध्यान करते थे और आम लोग घर में ही पूजा अर्चना करते थे? क्या ब्रह्मनिष्ठ लोग भी पूजा अर्चना करते थे?
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भारत के प्राचीन और पौराणिक हिन्दू शास्त्रों में समुद्र का अद्भुत वर्णन मिलता है। समुद्र के रहस्यमयी लोक के बारे में समुद्र के कई तरह के रोचक और रोमां‍चक जीवों का वर्णन पढ़कर मन रोमांचित हो जाता है। आओ जानते हैं कि हिन्दू शास्त्रों में कैसे है समुद्र ...
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प्राचीन भारत में ऋषि-मुनि वन में कुटी या आश्रम बनाकर रहते थे। जहां वे ध्यान और तपस्या करते थे। उक्त जगह पर समाज के लोग अपने बालकों को वेदाध्यन के अलावा अन्य विद्याएं सीखने के लिए भेजते थे। ब्रह्मचर्य आश्रम को ही मठ या गुरुकुल कहा जाता है। आओ जानते ...
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हिन्दू धर्म ग्रंथ वेद ही है। वेदों का सार उपनिषद और उपनिषदों का सार गीता है। अन्य ग्रंथ इतिहास, परंपरा और कर्मकांड के ग्रंथ हैं। पुराण का अर्थ होता है सबसे पुरातन। सबसे प्राचीन। इतिहास ग्रंथों में वाल्मीकि रामायण, वेद्वास कृत महाभारत और पुराण आते ...
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हाल ही में दक्षिण भारत में रावण को महिमामंडित करने का प्रचलन बढ़ा है। इन लोगों के अनुसार रावण के पास खुद के हवाई जहाज और हवाई अड्डे थे। आओ जानते हैं इस संबंध के दावे को।
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हिन्दू वेद और पुराणों में प्राचीन या आदिम काल के ऐसे जीव-जंतुओं का उल्लेख है जिनके बारे में जानकर आप चकित रह जाएंगे। आपने ऐसे प्राणी किसी जुरासिक फिल्म में या हॉलीवुड की साइंस फिक्शन या फ़ैन्टसी फिल्मों भी नहीं देखें होंगे। आओ जानते हैं ऐसे ही 10 ...
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प्राचीनकाल में सुर, असुर, देव, दानव, दैत्य, रक्ष, यक्ष, दक्ष, किन्नर, निषाद, वानर, गंधर्व, नाग, चारण आदि जातियां होती थीं। राक्षसों को पहले 'रक्ष' कहा जाता था। 'रक्ष' का अर्थ, जो समाज की रक्षा करें। राक्षस लोग पहले रक्षा करने के लिए नियुक्त हुए थे, ...
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हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में अनेकों अनेक वरदाना और श्रापों का वर्णन मिलता है। जहां तक श्राप का संबंध है जो हर एक के पीछे कोई कहानी और कारण मिलता है। वरदानों ने जितना घटनाक्रम को संचालित किया उससे कहीं ज्यादा श्रापों ने भविष्य में होने वाली घटनाओं को ...
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5 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखे जाने के बाद मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। आओ एक नजर डालते हैं मंदिर के इतिहास की 10 खास बातों पर।
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चीन का इतिहास बहुत ही प्राचीन है लेकिन चीन कभी भी प्राचीन काल में उतना समृद्ध नहीं रहा जितना की भारत रहा है। चीन ने भारत से बहुत कुछ सीखा। चीन ने भारत से ज्ञान, धर्म, और संस्कृति के सूत्रों को ग्रहण किया तो भारत ने भी चीन के वस्त्र, कागज, खानपान और ...
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अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए 2 रास्ते हैं- एक पहलगाम होकर जाता है और दूसरा सोनमर्ग बालटाल से जाता है। यानी देशभर के किसी भी क्षेत्र से पहले पहलगाम या बालटाल पहुंचना होता है। इसके बाद की यात्रा पैदल की जाती है। आओ जानते हैं अमरनाथ के 10 रहस्य।
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अमरनाथ की इस पवित्र गुफा में भगवान शंकर ने भगवती पार्वती को मोक्ष का मार्ग दिखाया था। इस तत्वज्ञान को 'अमरकथा' के नाम से जाना जाता है इसीलिए इस स्थान का नाम 'अमरनाथ' पड़ा। यह कथा भगवती पार्वती तथा भगवान शंकर के बीच हुआ संवाद है। यह उसी तरह है जिस ...
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