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Gahoi Samaj Day : गहोई समुदाय की जानकारी

शुक्रवार,जनवरी 15, 2021
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उत्तररांचल प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। हरि याने भगवान विष्णु। हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि (बद्रीनाथ) का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के ...
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मथुरा उत्तर प्रदेश जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। यमुना नदी के पश्चिमी तट पर बसा विश्व के प्राचीन शहरों में से एक मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। इस शहर का इतिहास बहुत ही पुराना है। यह शहर रामायण काल से ...
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आचार्य चाणक्य को ही कौटिल्य, विष्णु गुप्त और वात्सायन कहते हैं। उनके पिता का नाम चणक था। चणक का पुत्र होने के कारण उन्हें चाणक्य कहा गया। उनका जीवन बहुत ही कठिन और रहस्यों से भरा हुआ है। उन्होंने ही अर्थशास्त्र, कामसूत्र जैसे ग्रंथ लिखे हैं। तमाम ...
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भगवान राम की नगरी अयोध्या हजारों महापुरुषों की कर्मभूमि रही है। यह पवित्र भूमि हिन्दुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था। यह राम जन्मभूमि है। इस राम जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर बना था जिसे तोड़ दिया गया था। आओ जानते हैं ...
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भारतीय धर्म, कला, संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन, तंत्र मार्ग और काला जादू की भूमि बंगाल क्रांतिकारियों की भी जन्मभूमि रही है। बंगाल के बारे में जितना कहा और लिखा जाए उतना कम है, परंतु बंगाल का विभाजित हो जाना भारत का सबसे बड़ा नुकसान रहा। मुगल और ...
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भारतीय धर्म, संस्कृति और इतिहास में सिंधु नदी, सिंधु देश और सिंधि भाषा का बहुत ही महत्व है। भारत का बंटवारा हुआ तो यह सभी पाकिस्तान के हिस्से में चले गए और फिर इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास, भाषा और संस्कृति को मिटाने का कूचक्र चला। परंतु अब ...
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शास्त्रों के अनुसार देवराज इन्द्र के स्वर्ग में कई अप्सराओं में से 11 अप्सराएं प्रमुख सेविका थीं। ये 11 अप्सराएं हैं- कृतस्थली, पुंजिकस्थला, मेनका, रम्भा, प्रम्लोचा, अनुम्लोचा, घृताची, वर्चा, उर्वशी, पूर्वचित्ति और तिलोत्तमा। इन सभी अप्सराओं की ...
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हैदराबाद नगर निकाय चुनाव (Greater Hyderabad Municipal Elections 2020) में टीआरएस, सबसे बड़े दल के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। इस चुनाव में सबसे बड़ी टक्कर एआईएमआईएम और भाजपा के बीच थी। भाजपा के प्रचार में यह नारा लगाया जा रहा था कि भाजपा एक दिन ...
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15 अगस्त 1947 को भारतवर्ष हिन्दुस्तान तथा पाकिस्तान दो हिस्सों में बंटकर स्वतंत्र हो गया। भारत की आजादी के साथ जुड़ी देश-विभाजन की कथा बड़ी व्यथा-भरी है। कुछ लोग भारत विभाजन के खिलाफ थे, कुछ पक्ष में थे और कुछ ऐसे लोग थे, जो भारत के धर्म आधारित ...
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भारत को एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। यहां पर प्राचीनकाल से ही खेती की जा रही है। सवाल यह उठता है कि भारत में कृषि करना कब से प्रारंभ हुआ और क्या रामायण एवं महाभारत काल में भी होते थे किसान या होती थी खेती-किसानी? क्या है इसके सबूत? जानिए ...
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प्राचीन भारत में महाजनपद के अंतर्गत सैंकड़ों स्वतंत्र जनपद हुआ करते थे। सभी महाजनपद मिलकर एक भारत का रूप लेते थे परंतु सभी की सत्ता स्वतंत्र थी। इसमें जो चक्रवर्ती सम्राट होता था उसी का संपूर्ण भारत पर अधिकार होता था। भारत में ऐसे कई शासक हुए हैं ...
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राजा दाहिर कौन थे?

शनिवार,नवंबर 28, 2020
वर्तमान में सिंध के राजा दाहिर, पंजाब के महाराज रणजीत सिंह और सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पाकिस्तान में जोर-शोर से चर्चाएं चल रही हैं। भारत में भी इसको लेकर कुछ जगहों पर चर्चा है। पाकिस्तान का एक वर्ग यह मानता है कि पाकिस्तान के बच्चों को उनके देश ...
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19 नवंबर 2020 को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती है। वह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थीं। उन्होंने कभी भी विदेशी आक्रांताओं और शासकों की दासता स्वीकार नहीं की और अपनी मातृभूमि की रक्षार्थ बलिदान दे दिया। आओ जानते हैं उनके ...
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महाभारत के बाद बौद्ध काल के प्राचीन भारत में मगध और गांधार दो ऐसे सत्ता के केंद्र थे जहां से धर्म, राजनीति, शिक्षा और समाज की हर तर की गतिविधियां संचालित होती थी। महाभारत काल में 16 जनपद में मगध जनपद सबसे शक्तिशली जनपद था जिसका सम्राट जरासंध था। ...
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चौंसठ कलाओं में से एक चित्रकला का एक अंग है अल्पना। इसे ही मांडना भी कहते हैं और इसी का एक रूप है रंगोली। प्राचीन भारत में पहले दिवाली पर मांडना बनाए जाने का ही प्रचलन था परंतु अब रंगोली का प्रचलन ज्यादा है फिर भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ...
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दीपावली का त्योहार कब से मनाना प्रारंभ किया गया यह जानना बहुत जरूरी है। कई लोग कहेंगे कि रामायण काल में राम के अयोध्या आगमन के समय दीपावली मनाई गई थी तभी से यह त्योहार प्रचलन में है परंतु इस त्योहर से जुड़े और भी कई तथ्‍य हैं।
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भारतीय लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ऋषि मुनियोंकी संतानें हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश के कई पुत्र और पुत्रियां थी। इन सभी के पुत्रों और पुत्रियों से ही देव (सुर), दैत्य (असुर), दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, किन्नर, वानर, नाग, चारण, निषाद, मातंग, रीछ, ...
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मथुरा अंधक संघ की राजधानी थी और द्वारिका वृष्णियों की। ये दोनों ही यदुवंश की शाखाएं थीं। यदुवंश में अंधक, वृष्णि, माधव, यादव आदि वंश चला। श्रीकृष्ण वृष्णि वंश से थे। वृष्णि ही 'वार्ष्णेय' कहलाए, जो बाद में वैष्णव हो गए। भगवान श्रीकृष्ण के पूर्वज ...
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हमारे देश के ऐसे कई वीरों और वीरांगनाओं की दास्तान दबा दी गई जिन्होंने मुगल और अंग्रेजों से लड़कर विजयी प्राप्त की थी। उन्हीं में से एक थीं रानी दुर्गावती। दुर्गावती के वीरतापूर्ण चरित्र को भारतीय इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। सचमुच वह मां दुर्गा ...
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