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प्राचीन भारत के पुरातात्विक अवशेषों पर एक नजर

शुक्रवार,अप्रैल 9, 2021
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समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। दयानंदजी का जन्म 12 फरवरी सन् 1824 में हुआ। तिथि के अनुसार फल्गुन मास की कृष्ण दशमी के दिन उनका जन्म हुआ था। उनकी माता का नाम अमृतबाई और पिता का नाम अंबाशकर था। उन्होंने 1846, 21 वर्ष ...
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मथुरा उत्तर प्रदेश जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। यमुना नदी के पश्चिमी तट पर बसा विश्व के प्राचीन शहरों में से एक मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। इस शहर का इतिहास बहुत ही पुराना है। यह शहर रामायण काल से ...
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अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहां महल, मंदिर और तमाम तरह के आश्रम बने हुए थे। लेकिन गुलामी के काल में आक्रांतानों ने यह सभी तोड़ दिए थे। पुरातात्विक खुदाई और अवशेषों से अब यह सिद्ध हो चुका है कि रामलला जहां विराजमान है वहीं श्रीराम का जन्म ...
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सम्राट चन्द्रगुप्त महान थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान कहा जाता है। सिकंदर के काल में हुए चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु चाणक्य थे। चन्द्रगुप्त ने अपने पुत्र बिंदुसार को ...
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गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे सोमनाथ नामक विश्वप्रसिद्ध मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों से एक स्थापित है। पावन प्रभास क्षेत्र में स्थित इस सोमनाथ-ज्योतिर्लिंग की महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत तथा स्कंद पुराणादि में विस्तार से ...
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धरती पर ऐसे कई वंश हैं या लोग हैं जो कि अप्सराओं की संताने हैं। ये सभी अप्सराएं इंद्र के राज में रहती थी। हिमालय में कहीं पर इंद्र का राज हुआ करता था। इंद्र के आदेशानुसार समय-समय पर यह अप्सराएं मैदानी क्षेत्रों में आकर ऋषि मुनियों की तपस्या भंग करती ...
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भारतीय इतिहास को दिल्ली पर ही केंद्रित रखे जाने के कारण भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के दिल्ली के राजाओं से कहीं अधिक महान राजाओं की गाथा को भुला दिया जाता है। उन्हीं में से एक है असम के आहोम राजा। प्राचीनकाल में असाम प्रागज्योतिषपुर का क्षेत्र ...
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हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन की पूर्णिमा को होली का त्योहार मनाया जाता है। कहते हैं कि यह सबसे प्राचीन उत्सव में से एक है। हर काल में इस उत्सव की परंपरा और रंग बदलते रहे हैं। आओ जानते हैं इसका इतिहास।
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भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते थे। वहीं रहकर वे कई जगह आकाश मार्ग से भ्रमण करते थे। इस दौरान विशेष परि‍स्थितियों में जहां भी उन्होंने धरती पर कदम रखे, वहां उनके पैरों के निशान बन गए। भारत में ऐसे कई निशान हैं। भगवान शिव के पैरों के निशान के दर्शन ...
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तक्षशिला और पाटलीपुत्र के ध्वंस के बाद महाभारत युद्ध और बौद्ध काल के बीच के हिंदू इतिहास के अब बस खंडहर ही बचे हैं। इस धूमिल से इतिहास को इतिहासकारों ने खुदाईयों और ग्रंथों की खाक छानते हुए क्रमबद्ध करने का प्रयास किया है। हड़प्पा, सिंधु और ...
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भद्राचल रामदास- 1620 में जन्मे और 1688 में ब्रह्मलीन भद्राचल रामदास का पूर्व नाम गोपन या गोपन्ना था। गोपन, अब्दुल हसन तान शाह के दरबार में तहसीलदार थे। उन्हें एक महिला के स्वप्न के आधार पर भद्रगिरि पर्वत से राम की मूर्तियां मिलीं। तब उन्होंने खम्माम ...
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प्राचीन काल में ऐसी कई भाषाएं या उनकी लिपियां लुप्त होकर अब रहस्य का विषय बनी हुई है। भारत की इन लिपियों का रहस्य खुल जाए तो भारत के प्राचीन इतिहास का भी एक नया ही आयाम खुल सकता है। भारत में कई जगह ऐसी लिपियों में कुछ लिखा हुआ है जिन्हें अभी तक पढ़ा ...
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आजकल इतिहास को पुरावशेषों से सर्टिफाइड किया जाता है। रामायण में क्या लिखा है, महाभारत में क्या लिखा है या वेदों में क्या लिखा है इसका कोई महत्व नहीं, परंतु यदि खुदाई में मिट्टी के बर्तन पाए गए हैं, रथ निकले हैं, आभूषण निकले हैं तो उससे तय होगा कि इस ...
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कल्प समय की अंतिम ईकाई के पहले की गणना है। जैसे रुपये कि गणना में हजार, लाख, करोड़, अरब और नील होते हैं उसी तरह कल्प अंतिम से पहले की गणना है। हिन्दू धर्म ने धरती के इतिहास को कल्प में बताया गया है। कल्प के बाद ब्रह्मा आता है। उस दौरान महाप्रलय होकर ...
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हिन्दू धर्म में विवाह के कई प्रकार हैं जिसमें से ब्रह्म विवाह को ही विवाह का उत्तम और वैदिक विवाह माना गया है। पुराणों में शिव, सती और पार्वती विवाह, राम सीता का विवाह, रुक्मणी और कृष्ण विवाह, तुलसी विवाह और गणेशजी के विवाह के साथ ही विष्णु लक्ष्मी ...
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भारत के पांच हिस्से हैं एक उत्तर भारत, दूसरा पर्वोत्तर भारत, तीसरा पश्चिम भारत, चौथा मध्य भारत और पांचवां दक्षिण भारत। दक्षिण भारत का केंद्र तमिल रहा है। जिस तरह उत्तर या पश्चिम भारत में मोहनजोदड़ो या सिंधु घाटी की सभ्यता को सबसे प्राचीन माना जाता ...
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भारत में प्राचीनकाल से ही टैक्स की व्यवस्था रही है और उस टैक्स को सैन्य क्षमता बढ़ाने और जनता के हित में खर्च करने का प्रावधान भी रहा है। फूटी कौड़ी से कौड़ी, कौड़ी से दमड़ी, दमड़ी से धेला, धेला से पाई, पाई से पैसा, पैसा से आना, आना से रुपया तो बाद ...
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संसद में मोदी सरकार 2 का दूसरा बजट पेश किया। इस बजट में 5 पुरातात्विक स्थलों के संवरक्षण और विकसित करने का ऐलान किया। आओ जानते हैं इन पुरातात्विक स्थलों के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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कहते हैं कि क्षीरसागर में ही समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन के दौरान मंदरांचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया था। देवता और और दैत्यों ने मिलकर इस पहाड़ के द्वारा समुद्र को मंथन किया था। इस मंथन से पहले कालकूट नामक विष निकलने के बाद 14 ...
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