Hanuman Chalisa

ऐसा उत्पन्न हुआ धरती पर मानव और ऐसे खत्म हो जाएगा

Updated: मंगलवार, 17 जुलाई 2018 (15:41 IST)
हिन्दू धर्म अनुसार प्रत्येक ग्रह, नक्षत्र, जीव और मानव की एक निश्‍चित आयु बताई गई है। वेद कहते हैं कि प्राकृतिकक्रम से जो जन्मा है वह मरेगा। यह सही है कि कोई अपने प्रयास से अपनी उम्र बढ़ा या घटा ले। धरती को मनुष्य वक्त के पहले ही मारने में लगा तो निश्चित ही वह भी वक्त के पहले ही मरेगा। हालांकि वेद और योग में सभी की आयु बढ़ाने के सरल और सहज उपाय बताए गए हैं। 
 
 
1.गर्भकाल
करोड़ों वर्ष से धरती जल में डूबी हुई थी। जल में ही विभिन्न वनस्पतियों की उत्पत्ति हुई। वनस्पतियों की तरह ही एक कोशीय बिंदु रूप जीवों की उत्पत्ति हुई, जो न नर थे और न मादा।
 
 
2.शैशव काल : संपूर्ण धरती जब जल में डूबी हुई थी तब जल के भीतर अम्दिज, अंडज, जरायुज, सरीसृप (रेंगने वाले) केवल मुख और वायु युक्त जीवों की उत्पत्ति हुई।
 
 
3.कुमार काल : इसके बाद पत्र ऋण, कीटभक्षी, हस्तपाद, नेत्र श्रवणेन्द्रियों युक्त जीवों की उत्पत्ति हुई। इनमें मानव रूप वानर, वामन, मानव आदि भी थे।
 
 
4.किशोर काल : इसके बाद भ्रमणशील, आखेटक, वन्य संपदाभक्षी, गुहावासी, जिज्ञासु अल्पबुद्धि प्राणियों का विकास हुआ।
 
 
5. युवा काल : फिर कृषि, गोपालन, प्रशासन, समाज संगठन की प्रक्रिया हजारों वर्षों तक चलती रही।
 
 
6.प्रौढ़ काल : वर्तमान में प्रौढ़ावस्था का काल चल रहा है, जो लगभग विक्रम संवत 2042 पूर्व शुरू हुआ माना जाता है। इस काल में अतिविलासी, क्रूर, चरित्रहीन, लोलुप, यंत्राधीन प्राणी धरती का नाश करने में लगे हैं।
 
 
7. वृद्ध काल : मानव द्वारा धरती के संसाधनों का अति दोहन करने और जलवायु परिवर्तन के चलते माना जाता है कि इसके बाद आगे तक साधन भ्रष्ट, त्रस्त, निराश, निरूजमी, दुखी जीव रहेंगे।...इनकी आयु बहुत कम होगी।
 
 
8. जीर्ण काल : फिर इसके आगे अन्न, जल, वायु, ताप सबका अभाव क्षीण होगा और धरती पर जीवों के विनाश की लीला होगी। अत्यधिक ताप के चलते चारों और अग्नि का प्रकोप होगा।
 
 
9. उपराम काल : इसके बाद करोड़ों वर्षों आगे तक ऋतु अनियमित, सूर्य, चन्द्र, मेघ सभी विलुप्त हो जाएंगे। भूमि ज्वालामयी हो जाएगी। अकाल, प्रकृति प्रकोप के बाद  ब्रह्मांड में आत्यंतिक प्रलय होगा।

सबकुछ जलकर राख होकर महर्लोक में मिल जाएगा। करोड़ों वर्षों बाद पुन: ब्रह्मांड की रचना उसी भस्म से होगी।
 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

22 July Birthday: आपको 22 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 22 जुलाई 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

भड़ली नवमी 2026: खरीदारी के लिए कब रहेगा शुभ मुहूर्त? जानें अच्छे संयोग और खास समय

क्या हिंसक जन आंदोलन से होगा भारत में सत्ता परिवर्तन, क्या कहता है मेदिनी ज्योतिष?

गुप्त नवरात्रि की नवमी के दिन करें 5 महत्वपूर्ण कार्य

अगला लेख