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प्रेम गीत : मुझको दीवाना कह लो

Updated: शनिवार, 21 अप्रैल 2018 (17:05 IST)
डॉ. रूपेश जैन "राहत"

तुम्हे प्यार नहीं तो क्या
मुझको दीवाना कह लो
उम्मीदे वफ़ा नहीं तो क्या
मुझको दीवाना कह लो। 
 
धूं धूं जलते अंतर्मन में,
प्राण अभी बाकी रह गए
अस्तित्व बिखरने को था,
ठोकर खाकर सम्हल गए। 
 
दे जाती हो मृगतृष्णा तो क्या
मुझको दीवाना कह लो
नित्य प्रतीक्षा व्यर्थ तो क्या
मुझको दीवाना कह लो।
 
संघर्ष जीवन में कम नहीं,
छोटी छोटी खुशियां बटोर लो
सुख दुःख के साथी हैं मुश्किल,
जो मिला उसी में प्रेम टटोल लो। 
 
तेरा आना भ्रम तो क्या
मुझको दीवाना कह लो
तुम्हे प्यार नहीं तो क्या
मुझको दीवाना कह लो। 

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