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Sharad Purnima : चंद्र कौन हैं? कैसे हुआ उनका जन्म, जानिए अपने चंदा मामा को

बुधवार,अक्टूबर 28, 2020
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शरद पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है तथा कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। इस मौके पर आइए जानते हैं पौराणिक एवं प्रचलित कथा...
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देवी कात्यायनी को ही सभी देवों ने एक एक हथियार दिया था और उन्हीं दिव्य हथियारों से युक्त होकर देवी ने महिषासुर के साथ युद्ध किया था।
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पौराणिक कथा के अनुसार देवी ललिता आदि शक्ति का वर्णन देवी पुराण से प्राप्त होता है। नैमिषारण्य में एक बार यज्ञ हो रहा था जहां दक्ष प्रजापति के आने पर सभी देवता गण उनका स्वागत करने के लिए उठे।
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सत्यव्रत ने सुशील को भगवती दुर्गा की महिमा बताते हुए नवरात्रि व्रत करने का परामर्श दिया। सुशील ने सत्यव्रत को अपना गुरु बनाकर उनसे मायाबीज नामक भुवनेश्वरी मंत्र की दीक्षा ली।
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मां दुर्गा की तीसरी शक्ति हैं चंद्रघंटा। नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा-आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इसीलिए कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करना चाहिए।
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नवरात्रि की तृतीया को होती है देवी चंद्रघंटा की उपासना। मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सौम्य है। मां को सुगंधप्रिय है। उनका वाहन सिंह है। उनके दस हाथ हैं। हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र हैं। वे आसुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना करने ...
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मां दुर्गा को शेरांवाली के नाम से पुकारने के पीछे एक कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार -
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एक बार नारदजी वैकुण्ठ आए, तो उन्होंने देखा कि महाविष्णु चित्र बनाने में मग्न हैं .... विष्णु को उनकी ओर देखने का अवकाश नहीं।
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गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति देवता प्रसन्न होते हैं। यह व्रत अत्यंत फलदायी है। अग्निपुराण के अनुसार अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से आरंभ करके 7 गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति ग्रह की हर पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
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17 अक्टूूूूबर 2020 को नवरात्रि व्रत करने से पूर्व जरूरी है कि इस परम कल्याणकारी उत्सव की पवित्र कथा को जाना जाए। इस पर्व से संबंधित कई कथाएं प्रचलन में है प्रस्तुत है प्रमुख कथाएं-
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माह की किसी भी चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की पूजा के दौरान संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत की कथा पढ़ना अथवा सुनना जरूरी होता है।
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पुराणों में दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की अलग अलग कथाएं मिलती हैं। कई जगहों पर उन्हें माता सती या माता पार्वती की बहनें बताई गई हैं तो कुछ जगहों पर उन्हें माता सती का ही रूप बताया गया है। यह भी कहा जाता है कि उनमें से कुछ माता की बहनें हैं तो कुछ ...
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हज़ार साल के युद्ध और तपस्या के बाद फिर एक कवच टूटा और नारायण की मृत्यु हो गयी। फिर नर ने आकर नारायण को पुनर्जीवित कर दिया, और यह चक्र फिर फिर चलता रहा।
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यह उस समय की बात है जब भगवान शिव से वरदान और शक्तिशाली खड्ग पाने के बाद अहंकारी रावण और भी अधिक अहंकार से भर गया था। वह पृथ्वी से भ्रमण करता हुआ हिमालय के घने जंगलों में जा पहुंचा। वहां उसने एक रूपवती कन्या को तपस्या में लीन देखा। कन्या के रूप रंग ...
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नर्मदा की प्रेम-कथा लोकगीतों और लोककथाओं में अलग-अलग मिलती है लेकिन हर कथा का अंत कमोबेश वही कि शोणभद्र के नर्मदा की दासी जुहिला के साथ संबंधों के चलते नर्मदा ने अपना मुंह मोड़ लिया और उलटी दिशा में चल पड़ीं। सत्य और कथ्य का मिलन देखिए कि नर्मदा नदी ...
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महाराजा शर्याति अपनी पत्नी के साथ उस स्थान पर पहुंचे और देखते हुए दुखी मन से बोले- 'बेटी! तुमने बड़ा पाप कर डाला। यह च्यवन ऋषि हैं जिनकी तुमने आंख फोड़ दी है।'
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मुझे जल के साथ-साथ बिल्वपत्र बहुत प्रिय है।जो अखंड बिल्वपत्र मुझे श्रद्धा से अर्पित करते हैं मैं उन्हें अपने लोक में स्थान देता हूं।
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विनायक चतुर्थी की पौराणिक व्रत कथा के अनुसार एक दिन भगवान भोलेनाथ स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगवती गए। महादेव के प्रस्थान करने के बाद मां पार्वती ने स्नान प्रारंभ किया और घर में स्नान करते हुए
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इस वर्ष हिन्दू माह आश्विन माह में ही अधिक मास अर्थात मलमास या पुरुषोत्तम मास प्रारंभ हो रहा है जो 18 सितंबर 2020 से 16 अक्टूबर 2020 तक रहेगा। यही कारण है कि इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्त होने के एक माह बाद नवरात्रि प्रारंभ होगी। पुराणों में अधिकमास ...
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