Daily Horoscope
✕

श्रीकृष्ण के भाई बलराम में थीं आश्चर्यजनक शक्तियां, पर क्यों नहीं शामिल हुए महाभारत के युद्ध में...

Updated: मंगलवार, 20 अगस्त 2019 (17:07 IST)
महाभारत युद्ध के समय कई लोग युद्ध में शामिल नहीं हुए थे। उनमें से एक भगवान श्रीकृष्ण के भाई बलराम भी थे, जिन्हें बलदाऊ भी कहते हैं। बलराम बहुत शक्तिशाली थे। उन्होंने कई युद्ध लड़े थे लेकिन उनके महाभारत के युद्ध में शामिल नहीं होने के कई कारण थे। आइए जानते हैं बलराम के बारे में विशेष राज... 
 
बलराम का परिचय : 
कृष्ण को विष्णु तो बलराम को शेषनाग का अवतार माना जाता है। कहते हैं कि जब कंस ने देवकी-वसुदेव के छ: पुत्रों को मार डाला, तब देवकी के गर्भ में भगवान बलराम पधारे। योगमाया ने उन्हें आकर्षित करके नन्द बाबा के यहां निवास कर रही श्री रोहिणीजी के गर्भ में पहुंचा दिया। इसलिए उनका एक नाम संकर्षण पड़ा।
 
बलराम जी का विवाह रेवती से हुआ था। बलवानों में श्रेष्ठ होने के कारण उन्हें बलभद्र भी कहा जाता है। इनके नाम से मथुरा में दाऊजी का प्रसिद्ध मंदिर है। जगन्नाथ की रथयात्रा में इनका भी एक रथ होता है। यह गदा धारण करते हैं। मौसुल युद्ध में यदुवंश के संहार के बाद बलराम ने समुद्र तट पर आसन लगाकर देह त्याग दी थी। जरासन्ध को बलरामजी ही अपने योग्य प्रतिद्वन्द्वी जान पड़े। यदि श्रीकृष्ण ने मना न किया होता तो बलराम जी प्रथम आक्रमण में ही उसे यमलोक भेज देते।
 
महाभारत के युद्ध में क्यों नहीं शामिल हुए?
भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने श्रीकृष्ण को कई बार समझाया कि हमें युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए, क्योंकि दुर्योधन और अर्जुन दोनों ही हमारे मित्र हैं। ऐसे धर्मसंकट के समय दोनों का ही पक्ष न लेना उचित होगा। लेकिन कृष्ण को किसी भी प्रकार की कोई दुविधा नहीं थी। उन्होंने इस समस्या का भी हल निकाल लिया था। उन्होंने दुर्योधन से ही कह दिया था कि तुम मुझे और मेरी सेना दोनों में से किसी एक का चयन कर लो। दुर्योधन ने कृष्ण की सेना का चयन किया।
 
महाभारत में वर्णित है कि जिस समय युद्ध की तैयारियां हो रही थीं और उधर एक दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम, पांडवों की छावनी में अचानक पहुंचे। दाऊ भैया को आता देख श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर आदि बड़े प्रसन्न हुए। सभी ने उनका आदर किया। सभी को अभिवादन कर बलराम, धर्मराज के पास बैठ गए।
 
फिर उन्होंने बड़े व्यथित मन से कहा कि कितनी बार मैंने कृष्ण को कहा कि हमारे लिए तो पांडव और कौरव दोनों ही एक समान हैं। दोनों को मूर्खता करने की सूझी है। इसमें हमें बीच में पड़ने की आवश्यकता नहीं, पर कृष्ण ने मेरी एक न मानी। कृष्ण को अर्जुन के प्रति स्नेह इतना ज्यादा है कि वे कौरवों के विपक्ष में हैं। अब जिस तरफ कृष्ण हों, उसके विपक्ष में कैसे जाऊं? भीम और दुर्योधन दोनों ने ही मुझसे गदा सीखी है। दोनों ही मेरे शिष्य हैं। दोनों पर मेरा एक जैसा स्नेह है। इन दोनों कुरुवंशियों को आपस में लड़ते देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता अतः मैं तीर्थयात्रा पर जा रहा हूं।

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

दशहरा पर साईं बाबा का समाधि दिवस: क्या श्रीराम के भक्त थे साईं बाबा? जानिए वह रहस्य

19 October Birthday: आपको 19 अक्‍टूबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (19 अक्‍टूबर, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 19 अक्‍टूबर 2026: सोमवार का पंचांग और शुभ समय

18 October Birthday: आपको 18 अक्‍टूबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

अगला लेख