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क्या है कटास राज मंदिर का राज

हाल ही में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान में हिदुओं के पवित्र स्थानों में से एक कटासराज मंदिर में राम, शिव और हनुमान की मूर्तियां न होने पर नाराज़गी जाहिर की है। 
 
अदालत ने कहा कि इस मंदिर में पाकिस्तान और भारत के अलावा दुनियाभर से हिंदू समुदाय के लोग धार्मिक रस्में अदा करने आते हैं। अगर मंदिर में मूर्तियां नहीं होंगी, तो वो पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं के बारे में क्या धारणा बनाएंगे?
 
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मियां साक़िब निसार की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने कटासराज मंदिर की ख़राब हालत के बारे में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। मीडिया में ये ख़बरें आई थीं कि उस इलाके में सीमेंट की फैक्ट्रियों की वजह से मंदिर परिसर के अंदर का तालाब सूख रहा है। 
 
क्या है कटास राज मंदिर का राज
 
पाकिस्तान में प्राचीन शिव मंदिर है। यह पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के चकवाल जिले में है और कटास राज मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के मध्य करवाया गया था। कटासराज मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 कि.मी. की दूरी पर कटस में एक पहाड़ी पर है। कहा जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल (त्रेतायुग) में भी था। इस मंदिर से जुड़ी पांडवों की कई कथाएं प्रसिद्ध हैं।
 
मान्यताओं के अनुसार, कटासराज मंदिर का कटाक्ष कुंड भगवान शिव के आंसुओं से बना है। इस कुंड के निर्माण के पीछे एक कथा है। कहा जाता है कि जब देवी सती की मृत्यु हो गई, तब भगवान शिव उन के दुःख में इतना रोए कि उनके आंसुओं से दो कुंड बन गए। जिसमें से एक कुंड राजस्थान के पुष्कर नामक तीर्थ पर है और दूसरा यहां कटासराज मंदिर में।

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