पुष्कर स्थित गायत्री माता का मंदिर

भारत में गायत्री माता के कई प्राचीन मंदिर है परंतु राजस्थान के पुष्करजी में स्थित गायत्री माता के मंदिर को सबसे प्राचीन माना जाता है। पुष्करजी में एक तो माता सती का है, दूसरा ब्रह्माजी का प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां पर गायत्री माता भी विराजमान है और तीसरा माता सावित्री का मंदिर है। आओ जानते हैं तीनों के संबंध में संक्षिप्त जानाकरी।
1. मणिबन्ध मणिदेविक शक्तिपीठ : अजमेर के निकट विश्‍व प्रसिद्ध नामक स्थान से लगभग 5 किलोमीटर दूर गायत्री पर्वत पर दो मणिबंध (हाथ की कलाई) गिरे थे इसीलिए इसे मणिबंध स्थान कहते हैं। इसे मणिदेविक मंदिर भी कहते हैं। इसकी शक्ति है गायत्री और शिव को सर्वानंद कहते हैं। यह शक्तिपीठ मणिदेविका शक्तिपीठ नाम से ज्यादा विख्यात है।
2. पुष्कर राजस्थान : कहते हैं कि पुष्कर में ही यज्ञ के दौरान सावित्री के अनुपस्थित होने की स्थित में ब्रह्मा ने वेदों की ज्ञाता विद्वान स्त्री गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया था। ब्रह्माजी ने पुष्कर में कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णमासी तक यज्ञ किया था जिसकी स्मृति में अनादिकाल से यहां कार्तिक मेला लगता आ रहा है। आद्य शंकराचार्य ने संवत्‌ 713 में ब्रह्मा की मूर्ति की स्थापना की थी।यहां पर माता गायत्री की प्रतिमा भी विराजमान है।
3. सावित्री माता मंदिर : पुष्कर में रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित सावित्री माता का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भगवान ब्रह्मा की पत्नी देवी सावित्री को समर्पित है। सावित्री मंदिर काफी ऊंचाई पर स्थित है जिसकी वजह से मंदिर से पुष्कर शहर और आस-पास की सभी घाटियों का दृश्य काफी साफ दिखाई देता है।

उल्लेखनीय है कि हरिद्वार शांतिकुंज वाले गायत्री परिवार ने देश-दुनिया में गायत्री शक्तिपीठ स्थापित कर रखें हैं वहां पर आप गायत्री मंदिर में माता गायत्री के दर्शन कर सकते हैं।



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