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दक्षिण कैलाश के शिव-शंभु...

दक्षिण कैलाश
आंध्रप्रदेश के तिरुपति शहर के पास स्थित श्रीकालहस्ती नामक कस्बा शिव-शंभु के भक्तों के लिए विशेष महत्व का स्थान है। पेन्नारजी की शाखा स्वर्णामुखी नदी के तट पर बसा यह स्थान कालहस्ती के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत में स्थित भगवान शिव के तीर्थस्थानों में इस स्थान का विशेष महत्व है। नदी तट से पर्वत के तल तक विस्तारित इस स्थान को दक्षिण कैलाश व दक्षिण काशी नाम से भी जाना जाता है।

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इस मंदिर के तीन विशाल गोपुरम स्थापत्य का अनुपम उदाहरण हैं। साथ ही इसके सौ स्तंभों वाले मंडपम का भी अनोखा आकर्षण है। तिरुपति शहर के पास स्थित यह स्थान भगवान शिव के तीर्थक्षेत्र के रूप में पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है।

श्रीकालहस्ती का नामकरण -
मान्यता है कि इस स्थान का नाम तीन पशुओं - ‘श्री’ यानी मकड़ी, ‘काल’ यानी सर्प तथा ‘हस्ती’ यानी हाथी के नाम पर किया गया है, जिन्होंने शिव की आराधना करके अपना उद्धार किया था। एक अनुश्रुति के अनुसार मकड़ी ने शिवलिंग पर तपस्या करते हुए जाल बनाया था, जबकि सर्प ने लिंग से लिपटकर आराधना की और हाथी ने शिवलिंग को जल से स्नान करवाया था। यहाँ पर इन तीनों पशुओं की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।

स्कंद पुराण, शिव पुराण और लिंग पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी श्रीकालहस्ती का उल्लेख है। स्कंद पुराण के अनुसार एक बार इस स्थान पर अर्जुन
  स्कंद पुराण, शिव पुराण और लिंग पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी श्रीकालहस्ती का उल्लेख है। स्कंद पुराण के अनुसार एक बार इस स्थान पर अर्जुन पहुँचे थे।      
पहुँचे थे और उन्होंने प्रभु कालहस्तीवर का दर्शन किया था। तत्पश्चात पर्वत के शीर्ष पर भारद्वाज मुनि के भी दर्शन किए थे। ऐसा भी माना जाता है कि कणप्पा नामक एक आदिवासी ने यहाँ पर भगवान शिव की आराधना की थी। यह मंदिर राहुकाल पूजा के लिए भी जाना जाता है।

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अन्य आकर्षण - इस स्थान के आसपास बहुत से धार्मिक स्थल हैं। विश्वनाथ मंदिर, कणप्पा मंदिर, मणिकणिका मंदिर, सूर्यनारायण मंदिर, भरद्वाज तीर्थम, कृष्णदेवार्या मंडप, श्री सुकब्रह्माश्रमम, वैय्यालिंगाकोण (सहस्त्र लिंगों की घाटी), पर्वत पर स्थित दुर्गम मंदिर और दक्षिण काली मंदिर इनमें से प्रमुख हैं।

कैसे पहुँचें? इस स्थान से सबसे पास में स्थित हवाई अड्डा है तिरुपति, जो यहाँ से बीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मद्रास-वियजवाड़ा रेलवे लाइन पर स्थित गुंटूर व चेन्नई से भी इस स्थान पर आसानी से पहुँचा जा सकता है। विजयवाड़ा से तिरुपति जाने वाली सभी ट्रेनें कालहस्ती पर अवश्य रुकती हैं। आंध्रप्रदेश परिवहन की बस सेवा तिरुपति से हर दस मिनट पर इस स्थान के लिए उपलब्ध है।

कहाँ ठहरें? चित्तूर और तिरुपति में कई होटल आराम से मिल जाएँगे, जहाँ से इस स्थान पर आराम से दर्शन किए जा सकते हैं।
लेखक के बारे में
आई. वेंकटेश्वर राव
Possessing over 27 years of experience in journalism, the author has served as an Assistant Scriptwriter and Researcher for the electronic Media ETV and ETV2, as well as a Sub-Editor for the magazines Swathi Sapariwara patrika and Sunday Indian. In addition to these roles, the author has contributed short stories.... और पढ़ें