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नवरात्रि 2020 : किस कन्या को पूजने से मिलेगा कितना पुण्य

मंगलवार,अक्टूबर 20, 2020
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विधि विधान से कलश स्थापना के बाद 17 अक्टूबर 2020 से नवरात्रि का शुभ पर्व आरंभ हो जाएगा। इस बार तो कोरोना काल के कारण सुंदर मास्क और सेनेटाइजर की छोटी बॉटल भी दे सकते हैं। याद रखें कि कन्याओं को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाएं और कोरोना से बचाव की ...
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चंद्र देव सौम्य और शीतल देवता हैं लेकिन कुंडली में अशुभ हो तो कई परे‍शानियां देते हैं आइए जानते हैं उन्हें शुभ कैसे बनाया जाए...
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मंदिर में भगवान के दर्शन के समय अभिवादन हेतु सिर झुकाकर नमस्कार करें। मंत्र जाप करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखें। यदि भगवान के समक्ष बैठकर जाप करना हो तो इस ढंग से करें -
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नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलीपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। इसी वजह से मां के इस स्वरूप को शैलपुत्री कहा जाता है। इनकी आराधना से हम सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं।
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महाराजा अग्रसेन का जन्म आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल में हुआ था। अग्रकुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन प्रतापनगर के सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा वल्लभ के पुत्र थे
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17 अक्टूबर 2020 से नौ दिन माता भगवती को अपराजिता का फूल अर्पित कर बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। आइए जानें इन 9 दिनों में क्या करें, क्या न करें...
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17 अक्टूबर से नवरात्रि महोत्सव आरंभ होगा... जानिए नवदुर्गा के हर दिन की ‍तारीख...
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अमावस्या में दानवी आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं, तब मनुष्यों में भी दानवी प्रवृत्ति का असर बढ़ जाता है इसीलिए उक्त दिनों के महत्वपूर्ण दिन में व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को धर्म की ओर मोड़ दिया जाता है।
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यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहें हैं तो आपको 9 खास नियमों का पालन करना चाहिए।
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देवी माता के 51 शक्तिपीठों के बनने के सन्दर्भ में पौराणिक कथा प्रचलित है। राजा प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में माता जगदम्बिका ने सती के रूप में जन्म लिया था और भगवान शिव से विवाह किया।
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नारियल इस धरती के सबसे पवित्र फलों में से एक है। इसलिए इस फल को लोग भगवान को चढ़ाते हैं।
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हर पूजन से पहले यह स्वस्ति वाचन करना चाहिए। यह मंगल पाठ सभी देवी-देवताओं को जाग्रत करता है। (मंगल पाठ)
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वास्तुशास्त्र में यह बताया गया है कि दीपक की लौ किस दिशा में होने पर उसका क्या फल मिलता है।
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सोमवार के देवाता भगवान शिव और चंद्रदेव हैं। इस दिन प्रात:काल 7:30 से 9:00 बजे तक राहु काल रहता है। आओ जानते हैं कि इस दिन का क्या महत्व है और इस दिन कौनसा मंत्र जपें और पूजा कैसे करें।
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हमने अक्सर मंदिरों में आटे के दीये जलते हुए देखे हैं, लेकिन हम नहीं जानते कि ऐसा क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं शास्त्रसम्मत कुछ बातें...
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एक बार नारदजी वैकुण्ठ आए, तो उन्होंने देखा कि महाविष्णु चित्र बनाने में मग्न हैं .... विष्णु को उनकी ओर देखने का अवकाश नहीं।
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इन दिनों एक पोस्ट इधर से उधर घूम रही है कि महिलाएं आटा गूंथने के बाद उस पर उंगलियों से निशान क्यों बनाती हैं? इस पोस्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है लेकिन आमजन इसे मानने में कोई बुराई भी नहीं समझ रहे हैं..आइए जानते हैं क्या कहती है यह पोस्ट...
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हमारी सुबह यदि शुभ दर्शन और शुभ कार्यों के साथ शुरू होगी तो संपूर्ण दिन भी शुभ ही होगा।
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हम आपको बताएंगे गीता में उल्लेखित चार तरह के भक्तों के बारे में।
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