वाल्मीकि रामायण : महर्षि की अमर कृति
भगवान वाल्मीकि जयंती
- पांडुरंग राव
मानवता का निर्माण और संहार का परिहार वाल्मीकि रामायण की विषय-वस्तु से निकलने वाले दो प्रमुख तत्व हैं। इन दो बुनियादी मानव मूल्यों को अपने काव्य में प्रतिपादित करने के लिए बाल्मीकि को तमसा नदी की प्रसन्न और रमणीय जलधारा तथा क्रौंच-मिथुन के परम दारुणिक वियोग से प्रेरणा मिली थी। वाल्मीकि द्वारा प्रणीत इस महाकाव्य के मूल में ये ही दो घटनाएं आधार बनकर खड़ी होती हैं।
महाकाव्य की कलात्मक अभिव्यंजना में सर्वसमर्थ होने के कारण वाल्मीकि कभी भी उपदेशक या शिक्षक के रूप में अपनी बात नहीं कहते, बल्कि वे अपने पात्रों को अपना प्रवक्ता बना देते हैं।
वे भी अपने आचरण, शब्द और विचारों के माध्यम से अपनी और अपने कवि की बात कह देते हैं। उनको भी आचरण का माध्यम ही अधिक अच्छा लगता है। इधर-उधर कभी-कभी कुछ सामान्य तथ्य और सैद्धांतिक सत्य का निरूपण पाया जाता है, परंतु वह घटनाक्रम से अपने आप उभरकर आते हैं।
कुछ आदर्श पात्र हैं, जैसे राम, भरत, लक्ष्मण, सीता, सुमित्रा, सुमंत्र, गुह, जटायु, शबरी, हनुमान आदि। ये विभिन्न मानवीय गुणों का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। उनका आचरण देखकर पाठक स्वयं सोचने लगते हैं, 'हां' आदर्श पुत्र हो तो ऐसा होना चाहिए, पुत्र वत्सल पिता ऐसे ही होते हैं, भाई का प्रेम, पत्नी की पति-भक्ति, स्त्री की सेवा भावना जो कभी किसी की शिकायत नहीं करती है और हमेशा दूसरों की सहायता करने में तत्पर रहती है। ND
मानवता का निर्माण और संहार का परिहार वाल्मीकि रामायण की विषय-वस्तु से निकलने वाले दो प्रमुख तत्व हैं। इन दो बुनियादी मानव मूल्यों को अपने काव्य में प्रतिपादित करने के लिए बाल्मीकि को तमसा नदी की प्रसन्न और रमणीय जलधारा तथा क्रौंच-मिथुन के परम दारुणिक वियोग से प्रेरणा मिली थी। वाल्मीकि द्वारा प्रणीत इस महाकाव्य के मूल में ये ही दो घटनाएं आधार बनकर खड़ी होती हैं।
महाकाव्य की कलात्मक अभिव्यंजना में सर्वसमर्थ होने के कारण वाल्मीकि कभी भी उपदेशक या शिक्षक के रूप में अपनी बात नहीं कहते, बल्कि वे अपने पात्रों को अपना प्रवक्ता बना देते हैं।
वे भी अपने आचरण, शब्द और विचारों के माध्यम से अपनी और अपने कवि की बात कह देते हैं। उनको भी आचरण का माध्यम ही अधिक अच्छा लगता है। इधर-उधर कभी-कभी कुछ सामान्य तथ्य और सैद्धांतिक सत्य का निरूपण पाया जाता है, परंतु वह घटनाक्रम से अपने आप उभरकर आते हैं।
ND
बुद्धिमान और उत्साही परामर्शदायता, संकट में साथ देने वाला मित्र, सेवक जो अपनी सुविधा की अपेक्षा स्वामी की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देता है, संत महात्मा जो परम पद को छोड़कर और किसी सुख की कामना नहीं रखता है और एक कार्यकारी समर्थ व्यक्ति जो अपने कर्तव्य का पालन समर्पित भावना और निष्ठा से करता है। इन सभी आदर्शों के प्रतिदर्श रामायण में मिलते हैं।
भगवान वाल्मीकि ने सामाजिक समरसता, मानव गौरव व भ्रातृत्व की विराट भावना का आदर्श मानव समाज को सर्वप्रथम दिया।
ND

