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पौष मास के नियम : क्या करें क्या न करें

Updated: शुक्रवार, 23 दिसंबर 2022 (09:38 IST)
हिन्दू धर्म में पौष मास से संबंधित कुछ खास जानकारियां तथा नियम कहे गए हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है। यह माह सूर्य पूजा के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इसी माह में सूर्य धनु में प्रवेश करेंगे तथा यह महीना 7 जनवरी 2023 तक जारी रहेगा। आइए जानते हैं इस महीने के नियम- 
 
क्या करें-Paush me kya karen
 
- पौष मास में प्रतिदिन सूर्य मंत्र 'ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः' का जाप करते हुए सूर्यदेव का पूजन-अर्चन करें। 
 
- इस माह मुख्य रूप से सूर्य देव की उपासना करें।
 
- प्रतिदिन स्नान करके सूर्यदेव को जल अर्घ्य अर्पित करें।
 
- पौष में तिल, गुड़, कौड़ी, झाडू, कर्पूर, लाल तथा पीले वस्त्र, चांदी से निर्मित लक्ष्मी-श्री गणेश की मूर्ति अवश्य खरीद लाएं। 
 
- एक तांबे के पात्र से जल लेकर उसमें रोली, लाल पुष्प, अक्षत, गुड़ डालकर आसन पर खड़े होकर 'ॐ आदित्याय नमः' मंत्र से अर्घ्य चढ़ाएं। 
 
- जीवन में शुभता के लिए इस महीने लाल और पीले वस्त्रों को पहनें। 
 
- पौष मास में मध्यरात्रि में की गई साधना अधिक लाभकारी मानी जाती है। 
 
- इस माह में गुड़, अजवायन, लौंग और अदरक सेवन करना लाभदायी माना जाता है। 
 
- पौष मास में अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों या असहाय को तिल, गुड़, गर्म वस्त्र, कम्बल आदि का दान अवश्य करें।
 
- प्रति‍दिन अपने माता-पिता अथवा घर के बुजुर्गों के चरण स्पर्श करें। 
 
- पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पौष मास में पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, नदी स्नान व अर्घ्य तथा दान-पुण्य के कार्य अवश्‍य करें।
 
- सूर्य अर्घ्य के पश्चात अपनी मनोकामना कहें, भगवान सूर्य नारायण आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे। 
 
- पौष रविवार के दिन उपवास रखें, नमक ना लें।  
 
पौष मास में क्या न करें-Paush maas me kya nahi  karen 
 
- इस माह मांस, मंदिरा, मूली, बैंगन, उड़द दाल, मसूर दाल, फूल गोभी आदि का सेवन नहीं करें। 
 
- इस मास में किसी भी तरह के शुभ कार्य न करें। 
 
- शकर का सेवन कम से कम मात्रा करें।  
 
- बुरे वचनों, क्रोध, लोभ, लालच से दूर रहे। 
 
- खरमास के दौरान शुभ मांगलिक कार्यों, जैसे शादी, विवाह तथा विवाह संबंधी चर्चा भी न करें। 
 
- मलमास या खरमास में नए कार्य की शुरुआत न करें। 
 
- धार्मिक मान्यतानुसार पौष मास में नमक का सेवन कम से कम करना उचित होता है।
 
- साथ ही पौष मास में गृह प्रवेश, भूमि पूजन, हवन, मुंडन तथा जनेऊ संस्कार आदि शुभ कार्य नहीं करें। 

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