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महर्षि व्यास पूर्णिमा : वेदों के प्रथम व्याख्याता का करें पूजन...

Updated: गुरुवार, 6 जुलाई 2017 (14:21 IST)
* गुरु पूर्णिमा के दिन करें आदिगुरु वेद व्यास का पूजन 
 
गुरुर्ब्रह्मा गुरुःर्विष्णु र्गुरुदेवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
 
भारत भर में एक से बड़े एक अनेक संत, महापुरुष और विद्वान हुए हैं। परंतु उनमें महर्षि वेद व्यास, जो चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता थे, उनका पूजन गुरु पूर्णिमा के दिन किया जाता है।

आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। यह पर्व भारत भर में बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। 
 
प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करता था, तो इसी दिन श्रद्धा भाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति, अपने सामर्थ्यानुसार दक्षिणा देकर कृतकृत्य होता था।

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हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही हैं, अतः वे हमारे आदिगुरु हुए। इसीलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। 
 
उनकी स्मृति हमारे मन मंदिर में हमेशा ताजा बनाए रखने के लिए हमें इस दिन अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पाद-पूजा करनी चाहिए तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए गुरु का आशीर्वाद जरूर ग्रहण करना चाहिए। साथ ही केवल अपने गुरु-शिक्षक का ही नहीं, अपितु माता-पिता, बड़े भाई-बहन आदि की भी पूजा का विधान है।

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