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Elephant In Indian Mythology| हाथी के बारे में 10 पौराणिक तथ्य, जिसे जानकर चौंक जाएंगे आप
हाथी धरती का सबसे बड़ा स्तनपायी प्राणी है। सूंड के रूप में बड़ी हुई नाक इसकी पहचान है। यह भूमि से लगभग 7-8 फिट ऊंचा होता है। इसका धड़ बहुत चौड़ा और मोटा होता है। इसकी टांगें मोटे खंभे की तरह होती है। सूंड जितनी लंबी ही पूंछ भी होती है। काले और सफेद तो तरह के हाथी होते हैं। इसके दो लंबे दांत होते हैं जो मुंह के बाहर निकले होते हैं। इन्हीं दांतों के कारण तस्करी करने वाले लोग इन्हें मार देते हैं। इस कारण के अलावा भोजन की कमी के कारण भी यह प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है। आओ जानते हैं हाथी के बारे में 10 रोचक पौराणिक बातें।
1. हाथियों का पूर्वज ऐरावत : हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हाथियों का जन्म ऐरावत नाम के हाथी से माना जाता है। मतलब यह कि जैसे मनुष्यों का पूर्वज बाबा आदम या स्वयंभुव मनु है उसी तरह हाथियों का पूर्वज ऐरावत है।
2. 14 रत्नों में से एक : ऐरावत की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी और इसे इंद्र ने अपने पास रख लिया था। यह समुद्र से उत्पन्न 14 रत्नों में से एक है। गीता में श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन में हाथियों में ऐरावत हूं।
3. गणेश कथा से जुड़ा हाथी : हाथी को दुनिया के सभी धर्मों में पवित्र प्राणी माना गया है। इस पशु का संबंध विघ्नहर्ता गणपति जी से है। गणेश जी का मुख हाथी का होने के कारण उनके गजतुंड, गजानन आदि नाम हैं।
4. गजेंद्र मोक्ष कथा : पौराणिक कथा के अनुसार हाथी द्वारा विष्णु स्तुति का वर्णन मिलता है। गजेन्द्र मोक्ष कथा में इसका वर्ण मिलेगा। गजेन्द्र नामक हाथी को एक नदी के किनारे एक मगहर ने उसका पैर अपने जबड़ों में पकड़ लिया था जो उसके जबड़े से छूटने के लिए विष्णु की स्तुति की। श्री हरि विष्णु ने गजेन्द्र को मगर के ग्राह से छुड़ाया था।
5. गजपूजाविधि व्रत : हिन्दू धर्म में अश्विन मास की पूर्णिमा के दिन गजपूजाविधि व्रत रखा जाता है। सुख-समृद्धि की इच्छा से हाथी की पूजा करते हैं। हाथी को पूजना अर्थात गणेशजी को पूजना माना जाता है। हाथी शुभ शकुन वाला और लक्ष्मी दाता माना गया है।
6. मंदिरों में हाथी की मूर्ति : भारत में अधिकतर मंदिरों के बाहर हाथी की मूर्ति लगाई जाती है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार भारतीय घरों में भी चांदी, पीतल और लकड़ी का हाथी रखने का प्रचलन है।
7. शिव बने हाथी : एक पौराणिक कथा के अनुसार शनि की वक्र दृष्टि से बचने के लिए एक बार भगवान शिव कुछ समय के लिए हाथी बन गए थे। इसके बाद भगवान शंकर मुस्कराकर शनिदेव से बोले, आपकी दृष्टि का मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। यह सुनकर शनिदेव मुस्कराकर बोले, प्रभु! मेरी ही दृष्टि के कारण आपको सवा प्रहर के लिए देवयोनी को छोड़कर पशुयोनी में जाना पड़ा। इस प्रकार मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ गई और आप इसके पात्र बन गए।
8. प्राचीन किताबों में हाथी : भारत की प्राचीन किताबों जैसे जातक कथा, पंचतंत्र, हितोपदेश, उपनिषद कथाएं, वेताल पच्चीसी, सिंहासन बत्तीसी, तेनालीराम की कहानियां, शुकसप्तति, बाल कहानी संग्रह आदि में हाथी संबंधी कई कहानियां पढ़ने को मिलती है।
9. पौराणिक काल में हाथी की सवारी : हिंदुस्तान में प्राचीनकाल से ही राजा लोग अपनी सेना में हाथियों को शामिल करते आएं हैं। प्राचीन समय में राजाओं के पास हाथियों की भी बड़ी बड़ी सेनाएं रहती थीं जो शत्रु के दल में घुसकर भयंकर संहार करती थीं।
10. सबसे संवेदनशील प्राणी : हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हाथी को सबसे संवेदनशील प्राणी माना जाता है। यह मनुष्य से ज्यादा समझदार और बुद्धिमान माना गया है। हाथियों की सूंघने की शक्ति बहुत ही तीव्र होती है। हाथी की स्मृति बहुत ही तेज होती है यह अपने हर साथी की पहचान कर उसके साथ बिताए हर दिन को याद रखते हैं। हाथी कभी भी आपस में लड़ते झगड़ते नहीं है यह बहुत ही अपवाद स्वरूप होता होगा। झुंड का कोई हाथी मर जाए तो सभी को बहुत दुख होता है।
