7 बड़े धर्मान्तरण और भारत बन गया बहुधर्मी देश

इस्‍लाम : सर्वप्रथम अरब व्‍यापारियों के माध्‍यम से इस्‍लाम धर्म 7वीं शताब्‍दी में दक्षिण भारत में और सिंधु नदी के बंदरगाह पर आया। इसके पहले इस्लाम ने अफगानिस्तान (पहले जो भारत का हिस्सा था) के उत्तर में हिन्दू शाही वंश पर हमला किया और भारतीय ‍दीवार को तोड़ दिया था।
7वीं सदी में इस्लाम के केरल, बंगाल दो प्रमुख केंद्र थे, जबकि पश्चिम भारत में अफगानिस्तान। इसके बाद 7वीं सदी में ही मोहम्मद बिन कासिम ने बड़े पैमाने पर कत्लेआम कर भारत के बहुत बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया, जहां से हिन्दू जनता को पलायन करना पड़ा। जो हिन्दू पलायन नहीं कर सके वे मुसलमान बन गए या मारे गए। जिस भू-भाग पर कब्जा किया था, वह आज का आधा पाकिस्तान है, जो पहले कुरु-पांचाल जनपद के अंतर्गत आता था। इस दौर में ईरान में सूफीवाद का प्रारंभ हुआ और भारत में सूफियों के माध्यम से इस्लाम का प्रचार-प्रसार हुआ। भारत में इस्लाम के प्रचार व प्रसार में सूफियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता हैं कि उन सूफी संतों के कारण इस्लाम बदनाम हुआ जिन्होंने मुस्लिम सुल्तानों के लिए जासूसी की। उस काल में संतों के प्रति विनम्र और संस्कारी हिन्दू कभी इसे समझ नहीं पाया। भारतीय शहरों और गांवों की सीमाओं पर बनी दरगाहें इसका सबूत है।> > इसके बाद मुकम्मल तौर पर 12वीं सदी में इस्लाम ने पूर्ण रूप से भारत में प्रवेश कर लिया था। तुर्क, ईरानी, अफगानी और मुगल साम्राज्य के दौर में भारत में इस्‍लाम धर्म दो तरीके से फला और फैला। पहला सूफी संतों के प्रचार-प्रसार से तथा दूसरा मुस्लिम शासकों द्वारा किए गए दमन चक्र से। इस काल में मुगल शासन के अंतर्गत रहने वाले गैर-मुस्लिमों पर तरह-तरह के कर लगाए जाते थे। इस कर के चलते भी कई लोगों ने इस्लाम कबूल किया। बाद में इस जजिया कर को मुगल बादशाह अकबर ने समाप्त करवा दिया था।
मुगल भारतीय नहीं थे, वे सभी तुर्क थे। अकबर, शाहजहां, औरंगजेब आदि सभी तुर्किस्तान के मंगोलवंशी थे। औरंगजेब के काल में उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ। उत्तर भारत के अधिकतर ब्राह्मणों को इस्लाम कबूल करना पड़ा जिन्होंने नहीं किया उन्होंने दूसरे राज्यों के गांवों में छुपकर अपनी जान बचाई। आज उत्तर प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत मुसलमान ब्राह्मण है इसका खुलासा एक डीएनए रिपोर्ट से हुआ।


 
औरंगजेब के काल में भारत में सबसे ज्यादा धर्मांतरण हुआ। उसने अपने राज्य में घोषणा करवा दी थी कि या तो इस्लाम कबूल करें या मरने के लिए तैयार रहें। इस दौर में हिन्दुओं ने सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर सिंह से अपनी रक्षा की गुहार लगाई थी। 'हिन्द की चादर' गुरु तेगबहादुर सिंहजी ने औरंगजेब की नीतियों का विरोध किया तथा इस्लाम धर्म स्वीकार करने का विरोध किया, जिसकी वजह से उन्हें दिल्ली में कैद कर दिसम्बर, 1765 ईस्वी में जान से मार दिया गया।

औरंगजेब के समय में ब्रज में आने वाले तीर्थ−यात्रियों पर भारी कर लगाया गया। काशी और मथुरा के कई मंदिर नष्ट किए गए, जजिया कर फिर से लगाया गया और हिन्दुओं को मुसलमान बनाने का कार्य जोरों से शुरु किया था। 

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