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चमेली और उसके फूल के 10 चमत्कारिक फायदे

Updated: शनिवार, 13 मार्च 2021 (17:51 IST)
चमेली को संस्कृत में सौमनस्यायनी, जनेष्टा, जाति, सुमना, चेतिका, हृद्यगन्धा, राजपुत्रिका कहते हैं और अंग्रेजी में जैस्मिन कहते हैं। चमेली तो आमतौर पर सभी जगह पाई जाती है। इसका पौधा 10 से 15 फुट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है। इसके सफेद रंग फूल मार्च से जून माह के बीच खिलते हैं। इसे घर के आसपास कहीं भी लगाया जा सकता है। हिमालय का दक्षिणावर्ती प्रदेश चमेली का मूल स्थान है।
 
चमेली मुख्यत: दो प्रकार की होती है। जैस्मिन ग्रैंडिफ्लोरम लिन्न और जैस्मिन हुमाइल लिन्न फ्लावर (स्वर्णयूथिका)। इसके और उप प्रकार होते हैं। जैस्मिन ग्रैंडिफ्लोरम के फूल सफेद होते हैं। जैस्मिन हुमाइल लिन्न के फूल पीले सुंगन्धित होते हैं। यहां चमेली के फायदे की जनकारी। चमेली की बेल होती है और पौधा भी। इसकी कली लंबी डंडी की होती है और फूल सफेद रंग के होते हैं। 
 
1. चमेली का उपयोग इत्र, सेंट, परफ्यूम, साबुद, क्रीम, तेल, शैम्पू आदि बनाने में करते हैं। 
 
2. इसके फूल आंगन में सुबह सुबह बिछ जाते हैं तो घर और परिवार भी खुशियों से भर जाता है। 
 
3. यह फूल भी चमत्कारिक और अद्भुत है। इसके घर आंगन में होने से आपके विचार और भाव में धीरे-धीरे बदलाव होने लगेगा। आपकी सोच सकारात्मक होने लगेगी।
 
4. चमेली फूल के कई औषधिय गुण होते हैं। इसका तेल भी बनता है। यह चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए बहुत ही उपयोगी होता है। 
 
5. चमेली के फूलों की खुशबू से दिमाग की गर्मी दूर होती है। सिर दर्द में चमेली के पत्ते के इस्तेमाल से लाभ मिलता है।
 
6. कान में अगर दर्द हो और कान से मवाद निकलती हो तो चमेली के पत्तों का उपयोग किया जाता है।
 
7. मुंह के रोग, मुंह की दुर्गंध और छाले में भी चमेली के पत्तों के रस का उपयोग किया जाता है। चमेली के और भी कई सारे औषधि गुण भी है।
 
8. हनुमानजी को चमेली का तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। हनुमानजी को हर मंगलवार या शनिवार सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना चाहिए। नियमित रूप से हनुमानजी को धूप-अगरबत्ती लगाना चाहिए। हार-फूल अर्पित करना चाहिए। हनुमानजी को चमेली के तेल का दीपक नहीं लगाया जाता बल्कि तेल उनके शरीर पर लगाया जाता है। ऐसा करने पर सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
 
9. चमेली का रस पीने से वात और कफ में काफी आराम मिलता है। यह शरीर को चुस्त-दुरुस्त और मन को प्रसन्न रखती है।
 
10. चर्म  रोग में भी चमेली लाभदायक होती है।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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