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Nirjala Ekadashi 2021 : निर्जला एकादशी के दिन कामधेनु-अनुष्ठान से मिलेंगे शुभ परिणाम

शुक्रवार,जून 18, 2021
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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी कहते हैं। इस वर्ष इस एकादशी का व्रत 21 जून 2021, सोमवार को मनाया जा रहा
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इस वर्ष शुक्रवार, 9 जुलाई 2021 को हलहारिणी अमावस्या मनाई जा रही है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह आषाढ़ महीने की अमावस्या है। इस दिन को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं।
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वर्ष 2021 में रविवार, 20 जून को गायत्री प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। शास्त्रों में गायत्री की महिमा के पवित्र वर्णन मिलते हैं। गायत्री मंत्र तीनों देव, बृह्मा, विष्णु और महेश का सार है।
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ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि अर्थात 20 जून 2021 गंगा दशहरा के दिन से बृहस्पति कुंभ राशि में वक्री गति से चलना शुरू कर देंगे और 120 दिन बाद यानी 18 अक्टूबर 2021 को पुन: मार्गी होंगे। हालांकि बीच में कुछ काल के लिए वक्री अवस्था में ही 14 ...
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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को 'गंगा दशहरा' का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह तिथि रविवार, 20 जून को आ रही है। इसलिए गंगा दशहरा इस साल 20 जून 2021 को मनाया जाएगा।
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पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्ल अष्टमी को देवी के अवतरण दिवस पर मां धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 18 जून को है।
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प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी यह पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 19 जून को महेश नवमी मनाई जाएगी।
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ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 20 जून 2021 को मनाया जाएगा। इसी दिन से बृहस्पति ग्रह लगभग 120 दिन तक वक्री चाल चलेंगे। इससे क्या होगा हमारे जीवन पर प्रभाव आओ जानते हैं।
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गंधर्व-वेद जो उपवेद भी कहलाता है, संगीत पर आधारित है। इसमें भी रोगियों के उपचार के लिए संगीत का उपयोग किए जाने का उल्लेख है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार यदि किसी जातक को किसी ग्रह विशेष से संबंधित रोग हो और उसे उस ग्रह से संबंधित
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कलश विश्व ब्रह्मांड, विराट ब्रह्मा एवं भू-पिंड यानी ग्लोब का प्रतीक माना गया है। इसमें सम्पूर्ण देवता समाए हुए हैं। पूजन के दौरान कलश को देवी-देवता की शक्ति, तीर्थस्थान आदि का प्रतीक मानकर स्थापित किया जाता है।
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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह अंतिम माह होता है इसके बाद चैत्र माह वैशाख, ज्येष्ठ और फिर आषाढ़। इस बार आषाढ़ का प्रारंभ अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 25 जून 2021 शुक्रवार को प्रारंभ होगा और 24 जुलाई शनिवार 2021 गुरु पूर्णिाम तक रहेगा। आओ जानते ...
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मोर के विषय में माना जाता है कि यह पक्षी किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों और प्रतिकूल चीजों के प्रभाव से बचाकर रखता है। यही वजह है कि अधिकांश लोग अपने घरों में मोर के खूबसूरत पंखों को लगाते हैं।
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मंगलवार को हनुमान जी का वार माना जाता है। यही मंगल तब और अधिक विशेष हो जाता है जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ता है। 15 जून यानी आज ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगल है।
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15 जून को मिथुन राशि में सूर्य प्रवेश कर रहे हैं,इसे मिथुन संक्रांति के नाम से जाना जाता है,12 राशियों के लिए मिथुन संक्रांति कैसी होगी,आइए जानते हैं...
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आज 15 जून को ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगलवार है। बड़े मंगलवार के दिन हनुमान जी पूजा करने से विशेष लाभ होता है।
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Mithun Sankranti 2021: जानिए कब है मिथुन संक्रांति, मुहूर्त, कथा और पूजन विधि...सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश जानिए क्या है महत्व
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यह समय आपके लिए शुभ फलदायी बना रहेगा। आपको व्यापार व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी और साथ ही रुके हुए कार्य पूरे होंगे। संतान व मित्रों से शुभ समाचार प्राप्त होंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।
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मिथुन संक्रांति के दिन सिलबट्टे को भूदेवी के रूप में पूजा जाता है। सिलबट्टे को इस दिन दूध और पानी से स्नान कराया जाता है।
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अगर आप इन 7 दिनों में वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं या कोई नया व्यापार आरंभ करने जा रहे हैं तो इस शुभ मुहूर्त में ही कार्य करें ताकि आपके कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सकें।
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