रक्तवन ग्लेशियर एवं अन्य 3 पर्वत चोटियों पर होगी जड़ी-बूटियों की खोज

एन. पांडेय| Last Updated: बुधवार, 14 सितम्बर 2022 (21:08 IST)
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम (उत्तरकाशी) में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए एवं अन्य 3 पर्वत चोटियों पर आरोहण हेतु जा रहे पतंजलि आयुर्वेद, निम एवं आईएमएफ के संयुक्त अभियान दल का फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर उन्होंने गंगोत्री धाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की एवं मां गंगा का आशीर्वाद लिया।

मुख्यमंत्री ने करीब 1 किलोमीटर तक रक्त वन ग्लेशियर जा रहे दल के साथ ट्रैकिंग भी की। उन्होंने आयोजित कार्यक्रम में मां गंगा की निर्मलता, अविरलता और स्वच्छता को लेकर शपथ दिलाई। धामी ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद, निम एवं आईएमएफ का संयुक्त ट्रैकिंग अभियान उत्तराखंड राज्य एवं भारतवर्ष के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

इस ट्रैक के माध्यम से आयुर्वेद, जड़ी-बूटी एवं वनस्पतियों और औषधियों के नए रूप सामने आएंगे। यह अभियान आयुर्वेद व जड़ी-बूटी में क्षेत्र में भी सहायता करेगा। उन्होंने कहा भारत ने संपूर्ण विश्व को योग एवं आयुर्वेद कि उपयोगिता को बताया है।
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने संकल्प लिया है कि हम उत्तराखंड को विश्व की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राजधानी बनाएंगे। मोदी ने केदार की भूमि से 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का बताया, जिस संकल्प को पूर्ण करने हेतु हम दिन-रात प्रयासरत हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार चारधाम यात्रा में अभी तक 32 लाख (रजिस्टर्ड) श्रद्धालुओं ने यात्रा की है। मां गंगा एवं बाबा केदार के आशीर्वाद से यात्रा सुगम एवं सुरक्षित चल रही है। कावड़ यात्रा के दौरान करीब 4 करोड़ कावड़िए शिवभक्त उत्तराखंड आए। पहली बार हमारी सरकार ने कावड़ यात्रा में बजट का प्रावधान किया।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड अध्यात्म एवं सांस्कृतिक राजधानी बनने जा रहा है। उत्तराखंड दुनिया का आयुर्वेद के क्षेत्र में नेतृत्व करे, इसके लिए पतंजलि, सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है। इसके लिए हम 1 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश करेंगे। युवा राज्य का विकास युवा मुख्यमंत्री से ही संभव हो सकता है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ही देश में सबसे पहले उत्तराखंड राज्य, समान नागरिक संहिता लागू किए जाने पर कार्य कर रहा है।
ने कहा कि इस अभियान के तहत हमारे द्वारा प्रकृति को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। निश्चित ही इस अभियान से हम सभी नया आयाम व मुकाम लेकर लौटेंगे। इस ट्रैक के माध्यम से ऐसी वनस्पतियां व औषधियां, जो कि किसी सूची में नहीं है, खोजने का काम करेंगे। उन्होंने इस यात्रा ट्रैक को शोध आधारित यात्रा बताया।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी तथा पतंजलि आयुर्वेद, हरिद्वार और भारतीय पर्वतारोहण संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से गंगोत्री के रक्तवन ग्लेशियर क्षेत्र में पर्वतारोहण तथा अन्वेषण अभियान 15 दिन तक आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस संयुक्त अभियान के दौरान अनाम तथा अनारोहित पर्वत शिखरों का आरोहण तथा हिमालय के इस दुर्गम क्षेत्र में अन्वेषण का कार्य संपन्न किया जाएगा।
इस इलाके में स्वतंत्रता के पश्चात 1981 में अन्वेषण का कार्य Joint Indo-French Exploration Team द्वारा किया गया था। इस अन्वेषण दल को अथक प्रयासों के बावजूद आधे इलाके का भ्रमण करने में ही कामयाबी मिल पाई। इसके पश्चात इस इलाके में आज तक कोई भी दल आरोहण व वनस्पति की में नहीं गया है।

इस संयुक्त अभियान को संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट, सेना मेडल के अतिरिक्त संस्थान के 2 पर्वतारोहण प्रशिक्षक दीप शाही, विनोद गुसांई तथा बिहारी सिंह राणा ( IMF Representative) करेंगे। इसके साथ पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार से आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में 7 सदस्यीय टीम इस संयुक्त अभियान में प्रतिभाग कर रही है।
इस संयुक्त अभियान का प्रमुख उद्देश्य हिमालय के दुर्गम क्षेत्र रक्तवन ग्लेशियर में अवस्थित अनाम तथा अनारोहित 6 हजार मी. से ऊंचे पर्वत शिखरों का आरोहण करने के साथ ही क्षेत्र में अन्वेषण का कार्य करना है। इसमें इस क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों से संबंधित जानकारियों को एकत्रित किया जाएगा। हिमालय में स्थित दुर्गम तथा विषम भौगोलिक क्षेत्र में औषधीय पौधों तथा पर्वतारोहण का संयुक्त सर्वेक्षण किया जाएगा।



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