suvichar

मूक पशुओं में खुशियां ढूंढते हैं गांधीधाम के धवल

Updated: रविवार, 31 जनवरी 2021 (21:01 IST)
-खुशबू मेस्सुरानी
मूक पशु न सिर्फ व्यक्ति के अच्छे मित्र होते हैं, बल्कि समय आने पर उनकी रक्षा भी करते हैं। गांधीधाम के रहने वाले धवल कप्टा के विचार भी कुछ ऐसे ही हैं। उनका मानना है कि दो पैर वाले इंसान धोखा दे सकते हैं, लेकिन 4 पैरों वाले पशु बहुत ज्यादा वफादार होते हैं। उनसे सिर्फ खुशियां ही मिलती हैं। 
 
धवल कुत्ते एवं अन्य जानवरों को पालने का शौक रखते हैं। वे उनके खाने-पीने से लेकर दवाई, वैक्सीन लगवाना आदि का पूरा ध्यान रखते हैं। वे कुत्तों को काफी करीब से जानते हैं। उनकी दवाइयां, नस्ल, व्यवहार का आदि का उन्हें पूरा ज्ञान है।
 
साइबेरियन हस्की, फ्रेंच बैल कुत्ते, सेंट बर्नार्ड, चाउ चाउ और ग्रेट डैन जैसे विदेशी नस्लों के कुत्तों का वे कारोबार भी करते हैं। हालांकि वे पहले कुत्तों को अडॉप्ट करने की सलाह देते हैं। 
 
कुत्तों के अलावा वे घोड़े, गाय और तोते पालने में भी रुचि रखते हैं। विदेशी नस्ल के कुत्तों के अलावा वे स्ट्रीट डॉग्स का भी पूरा ध्यान रखते हैं। सर्दियों में कम्बल, बोरी और खाने का पूरा इंतजाम करते हैं। जब कुत्तों की तबीयत खराब हो जाती है तो वे खुद उनका इलाज़ अस्पताल में करवाते हैं। 
 

Show comments

लॉन्च हुआ सस्ता 5G स्मार्टफोन, 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले, जानिए फीचर्स

MG Hector Tomahawk PHEV लॉन्च, 1100 KM से ज्यादा की रेंज, जानिए कीमत और फीचर्स

क्या होती है फ्लैश फ्लड? क्यों पहाड़ों से अचानक आता है बर्बादी का सैलाब और नेपाल प्रलय से भारत क्यों है अलर्ट पर

Gen Alpha मैदान में, पटना BPSC प्रदर्शन में 6 साल का आदित्य आया सुर्खियों में, CM सम्राट चौधरी के इस्तीफे की कर दी मांग

नितिन गडकरी का संन्यास वाला बयान संगठन के बाद सरकार में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत?

सभी देखें

नेपाल-तिब्बत में फिर आएगी तबाही? 47 ग्लेशियर झीलों से खतरा, कौनसी झीलें हैं सबसे ज्यादा खतरनाक?

4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

LIVE: नेपाल बाढ़ तबाही में कितने देशों के लोग शामिल, कहां गए 750 लोग, क्या फिर आएगा तांडव?

ब्रांडेड डिब्बा, नकली दवा! हर 3 में से 1 भारतीय को मिल रहा है नकली मेडिकल सामान! जानिए किस शहर में है सबसे ज्यादा खतरा

मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर बवाल, US संसदीय आयोग ने उठाए सवाल, RSS को बैन करने की मांग

अगला लेख