एलएसी पर तनातनी के बीच नाको चने चबाने जैसा है लेह राजमार्ग को खोलना

Author सुरेश एस डुग्गर| Last Updated: शनिवार, 19 दिसंबर 2020 (17:25 IST)
जम्मू। पिछले 12 दिनों से श्रीनगर को लेह से मिलाने वाला 434 किमी लंबा राजमार्ग बंद है। नतीजा यह है कि इस सड़क का जिम्मा उठाने वाला सीमा सड़क संगठन अर्थात बीआरओ परेशान है, क्योंकि एलएसी पर चीनी सेना के कब्जे के कारण बने हुए तनातनी के माहौल में इस राजमार्ग को सर्दियों में भी खुला रखने का आदेश है। इस महीने की 6 तारीख से ही जोजिला दर्रे के दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की कतार लगी हुई है। इनमें अधिकतर वाहन सैनिकों के हैं या फिर वे वाहन हैं जिनका इस्तेमाल सेना द्वारा एलएसी तक सप्लाई के लिए किया जा रहा है।
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करीब 3 फुट बर्फ जोजिला दर्रे पर अभी भी जमी हुई है। बीआरओ के जवान और मशीनें दिन-रात राजमार्ग को खोले के काम में जुटे हैं, पर बर्फीले तूफान उनका रास्ता रोकने की कोशिशों में हैं। बावजूद इसके वे इन तूफानों का सामना करते हुए बर्फ से लदे पहाड़ों को यह संदेश दे रहे हैं कि उनमें देशभक्ति कितनी कूट-कूटकर भरी है कि सरहद तक सप्लाई लाइन को जारी रखने की खातिर वे उनसे भी जूझने को तैयार हैं। श्रीनगर-लेह राजमार्ग अक्सर 4 से 5 महीने बर्फबारी के कारण बंद रहता है। जोजिला दर्रे पर 3 से 12 फुट बर्फ सब कुछ थामकर रख देती है। इस बार बीआरओ के लिए दोहरी समस्या पैदा हुई है।
एक अधिकारी के मुताबिक इस बार बर्फ बहुत ज्यादा गिरी है और चीन सीमा पर बने हुए तनाव की गर्मी का उस पर कोई असर नहीं दिख रहा है। भारत सरकार किसी भी तरह से इस राजमार्ग को खुला रखने का खतरा मोल लेना चाहती है। दरअसल, राजमार्ग बंद होने पर सारा दबाव वायुसेना पर आ पड़ा जिसका परिणाम यह है कि एलएसी पर तनातनी के कारण आर्थिक मोर्च पर भी जूझना पड़ रहा है।



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