चिराग पासवान ने बिना नाम लिए BJP पर साधा निशाना, बिना स्टार प्रचारक हासिल किए 6 प्रतिशत वोट

पुनः संशोधित शनिवार, 28 नवंबर 2020 (15:29 IST)
पटना। भाजपा ने सुशील मोदी को बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। राज्यसभा की यह सीट रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई है। रामविलास पासवान के बेटे और लोजपा प्रमुख ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। बिना भाजपा का नाम लिए चिराग ने कहा कि हाल ही में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी ने बिना किसी गठबंधन और स्टार प्रचारकों के एक सीट पर जीत हासिल की है।
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लोजपा के स्थापना दिवस के मौके पर चिराग पासवान ने एक पत्र लिखकर ये बातें कही। चिराग ने कहा कि लोजपा को 24 लाख वोट और लगभगत 6 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, जो पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को बताते हैं। चिराग ने पत्र में लिखा कि पापा (रामविलास पासवान) अब हमारे बीच नहीं हैं, जिससे हम सभी को अपूरणीय क्षति हुई है। बिहार में पार्टी ने बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट के साथ कोई समझौता नहीं किया।
उन्होंने पत्र में लिखा बिहार विधानसभा चुनाव में जाने से पूर्व पार्टी के पास दो विकल्प थे- पहला, बिहार से 6 लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद होने के बावजूद गठबंधन द्वारा दी जा रही मात्र 15 सीटों पर चुनाव लड़े। दूसरा अधिकांश सीटों पर फ्रेंडली फाइट करें। लोजपा संसदीय बोर्ड ने दूसरा रास्ता चुना व बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट संकल्प के साथ अकेले 135 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे।
चिराग ने आगे लिखा है कि 2015 का विधानसभा चुनाव लोजपा ने गठबंधन के साथ मिलकर लड़ा था। इसमें पार्टी मात्र 2 सीट जीत पाई थी। मुझे गर्व है कि अकेले अपने झंडे के नीचे चुनाव लड़कर पार्टी ने एक मजबूत जनाधार बनाया है। हमारी लड़ाई बिहार पर राज करने की नहीं, बल्कि बिहार को बेहतर बनाकर उस पर गर्व करने की मुहिम में पार्टी लगी है, जिसके लिए पार्टी ने खुद संघर्ष का रास्ता चुना।
चिराग ने लिखा कि पार्टी ने बूथ स्तर तक एक करोड़ सदस्यता अभियान का लक्ष्य रखा था व अकेले 50 लाख सदस्य बिहार में बनाने थे, जिसे पूरा करने में सभी ने योगदान दिया और उसी का नतीजा सामने है कि पार्टी ने बिना गठबंधन स्टार प्रचारकों की फौज के अपने दम पर बिहार में 24 लाख वोट हासिल किया। इन चुनावों में अधिकांश कार्यकर्ताओं ने लोगों को लोजपा के चिन्ह पर चुनाव लड़ने से पार्टी और भी मजबूत हुई इसी कारण चुनावी जनसभाओं में कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था।



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