केजरीवाल ने राशन योजना की फाइल उपराज्यपाल के पास दोबारा भेजी

पुनः संशोधित गुरुवार, 17 जून 2021 (23:04 IST)
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना की फाइल को मंजूरी के लिए एक बार फिर के पास भेजा है। केजरीवाल ने एलजी की आपत्तियों का जवाब देते हुए गुरुवार को कहा कि राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना कानून के मुताबिक है और यह योजना के आदेशों का पालन करने के लिए लागू की गई।
कोरोना काल में इस योजना को रोकना गलत है। इसे लागू कर राशन की दुकानों पर लगने वाली भीड़ से बचा जा सकता है। पिछले तीन साल में चार बार एलजी को राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना को लेकर कैबिनेट के निर्णय की जानकारी दी गई, लेकिन उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। बीते फरवरी माह में इस योजना को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन किया गया, तब भी एलजी ने विरोध नहीं किया।

उन्होंने कहा, हमने केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को दूर किया और हाईकोर्ट ने अपनी पांच बार की सुनवाई के दौरान इस पर स्टे नहीं लगाया। साथ ही कोर्ट केस के दौरान केंद्र सरकार ने कभी किसी अनुमोदन के बारे में नहीं बताया, फिर इस योजना को क्यों रोका जा रहा है?

मुख्यमंत्री ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी की फाइल एलजी के पास दोबारा भेजते हुए उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा, मैंने उपराज्यपाल के नोट का अध्ययन किया है। जिसमें एक गंभीर गलतफहमी प्रतीत होती है। एलजी के समक्ष तात्कालिक मामला राशन की डोरस्टेप डिलीवरी स्कीम को मंजूरी नहीं है। यह योजना पहले ही अंतिम रूप ले चुकी है।

उन्होंने कहा है कि मंत्री परिषद ने 6 मार्च 2018 के कैबिनेट निर्णय के माध्यम से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के तहत लाभार्थियों के घर पर राशन (गेहूं के बदले पूरा आटा, चावल और चीनी) पहुंचाने की योजना को मंजूरी दी थी।

दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (डीएससीएससी) को परियोजना के लिए एकल कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में अनुमोदित किया गया था और 677 करोड़ रुपए परियोजना पर परिव्यय के रूप में मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में एलजी कार्यालय को सूचित किया गया था और एलजी द्वारा योजना को लेकर कोई विरोध नहीं किया गया।

इसके बाद, कैबिनेट ने 21 जुलाई 2020 को योजना में कुछ संशोधनों को मंजूरी दी और योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ (एमएमजीजीआरवाई) रखने का निर्णय लिया। साथ ही, कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (ओएनओआरसी) के कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए सभी एफपीएस में ई-पीओएस उपकरण लगाए जाएंगे और ई-पीओएस, एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड और ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ को एक साथ लागू किया जाएगा।

कैबिनेट के इस फैसले को एलजी कार्यालय में भी भेजा गया था और कोई आपत्ति नहीं जताई गई। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने 9 अक्टूबर 2020 को योजना को कार्यान्वयन संबधी पहलुओं पर निर्णय लिया और दो चरणों में इसके कार्यान्वयन को मंजूरी दी। कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में उपराज्यपाल के कार्यालय को भी जानकारी दी गई और एलजी द्वारा योजना के कार्यान्वयन के इस निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं व्यक्त की गई।

इसके बाद, ने 15 अक्टूबर 2020 और 19 अक्टूबर 2020 को निविदाएं जारी कीं और योजना के कार्यान्वयन के लिए तैयारी शुरू कर दी। इसके अलावा, इस योजना को 20 फरवरी 2021 को अधिसूचित किया गया। इस नोटिफिकेशन की एक कॉपी उपराज्यपाल को भेजी गई थी।

4 जुलाई 2018 को दिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, एलजी के पास उक्त योजना/ अधिसूचना पर अपनी आपत्ति जताने का एक और मौका था, लेकिन एलजी ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसलिए यह योजना पहले ही अंतिम रूप ले चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार की ओर से 19 मार्च 2021 को एक पत्र मिला, जिसमें इस योजना के नाम पर आपत्ति जताई गई है। हालांकि यह कानूनी रूप से जरूरी नहीं था, लेकिन किसी भी विवाद से बचने के लिए कैबिनेट की 24 मार्च 2021 को हुई बैठक में योजना का नाम पूरी तरह से हटा दिया गया। कैबिनेट के इस फैसले के माध्यम से केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को तत्काल हटा दिया गया।

कैबिनेट ने निर्णय लिया कि इस योजना का अब कोई नाम नहीं होगा। हालांकि निविदाओं सहित योजना के कार्यान्वयन के लिए उठाए गए सभी कदम मान्य रहेंगे। कैबिनेट के इस फैसले की एक कॉपी एलजी को भी दी गई थी, लेकिन एलजी ने कैबिनेट के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

कैबिनेट के इस निर्णय को प्रभावी करने और केंद्र सरकार की आपत्तियों को दूर करने के लिए एक नई अधिसूचना 24 मई 2021 को एलजी के पास भेजी गई। यह नई अधिसूचना है, जिस पर तत्काल विचार करने की आवश्यकता है। अब एलजी को यह तय करना है कि क्या वे केंद्र सरकार की आपत्तियों को दूर करते हुए नई अधिसूचना से सहमत हैं?

एलजी की उपरोक्त राय प्राप्त होने के बाद दिल्ली सरकार ने 15 जून 2021 को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया है कि हमने 24 मार्च 2021 को कैबिनेट के एक निर्णय के माध्यम से उनकी सभी आपत्तियों को स्वीकार करते हुए उन्हें दूर कर दिया है और हमने केंद्र को योजना का ब्यौरा भी दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महामारी की पहली लहर के दौरान लाभार्थी मिलों (आटा चक्की) के बंद होने के कारण गेहूं का उपयोग नहीं कर पाए थे। इन्हें राशन की दुकानों से गेहूं मिला, लेकिन लॉकडाउन के चलते आटा चक्की बंद होने के कारण गेहूं को आटे में बदलवा नहीं पाए। ऐसे में गेहूं की जगह आटा वितरित करने के निर्णय से इस समस्या का समाधान हो सकेगा, क्योंकि कोरोना महामारी के खत्म होने का अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।

यह योजना लोगों को वायरस से बचाने और संक्रमण फैलने के खतरे को भी कम करेगी। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित एफपीएस दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करना संभव नहीं है। इसलिए यह जरूरी है कि एनएफएसए लाभार्थियों के घर पर ही राशन दिया जाए।
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उन्होंने आगे कहा है कि यह बताया जा रहा है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर के दौरान बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इस दौरान माता-पिता और अभिभावकों को एफपीएस की दुकानों पर जाने के लिए मजबूर करने से बच्चों को वायरस का खतरा हो सकता है और परिणामस्वरूप बच्चे अधिक असुरक्षित हो सकते हैं।
तीसरी लहर के आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी देश की अधिकांश आबादी को वैक्सीन नहीं लग पाई है और देश वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता की समस्या से भी जूझ रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि जब तक पर्याप्त संख्या में लोगों वैक्सीन नहीं लग जाती है, तब तक लोगों को सार्वजनिक सेवाएं घर पर ही पहुंचाई जा सकती हैं।
इस योजना के लागू होने से उन एनएफएसए लाभार्थियों को परेशानी मुक्त सुविधा मिलेगी, जो वृद्ध/अशक्त, विकलांग, गर्भवती महिलाओं या शिशुओं की देखभाल करने वाली माताएं आदि एफपीएस दुकानों तक जाने में असमर्थ हैं।

यदि कोई राज्य सरकार अपनी पूरी आबादी को होम डिलीवरी का लाभ देना चाहती है, तो केंद्र सरकार को आपत्ति क्यों है? दूसरी बात यह है कि इसके लागू होने के बाद राशन की चोरी, मिलावट और कालाबाजरी आदि समस्या समाप्त हो जाएगी।(वार्ता)



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