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शिवजी का जब हुआ हनुमानजी से प्रलयंकारी युद्ध, क्या हुआ परिणाम जानिए

मंगलवार,जुलाई 20, 2021
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कलयुग में भवसागर को पार लगाने वाले दो ही हैं नाम चाहे कृष्ण कहो या राम। रामदूत हनुमानजी इन दोनों के ही सेवक हैं। ये दो नहीं असल में एक ही हैं। हनुमानजी को बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस संपूर्ण ब्रह्मांड में उनके आराध्य और आराध्य के ...
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महाभारत में श्रीमद्भागवत गीता के अलावा अनु गीता, हंस गीता, पराशर गीता, बोध्य गीता, विचरव्नु गीता, हारीत गीता, काम गीता, पिंगला गीता, वृत्र गीता, शंपाक गीता, उद्धव गीता, मंकि गीता, व्याध गीता जैसी अनेक गीताएं हैं। इसके अलावा गुरु गीता, अष्ट्रवक गीता, ...
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रामायण में उल्लेखित और अनेक अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार जब भगवान राम को वनवास हुआ तब उन्होंने अपनी यात्रा अयोध्या से प्रारंभ करते हुए रामेश्वरम और उसके बाद श्रीलंका में समाप्त की। इस दौरान उनके साथ जहां भी जो घटा उनमें से 200 से अधिक घटना स्थलों की ...
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जीवन हो मर्यादा जैसा लेकिन धर्म और न्याय की रक्षार्थ श्री कृष्ण होना ही होता है। मानव मन भेद में जिता है। इसलिए सामान्यजनों के लिए श्रीराम और श्री कृष्ण के दांपत्य जीवन और विवाह के जानिए 10 अंतर।
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महाभारत में श्रीमद्भागवत गीता के अलावा अनु गीता, हंस गीता, पराशर गीता, बोध्य गीता, विचरव्नु गीता, हारीत गीता, काम गीता, पिंगला गीता, वृत्र गीता, शंपाक गीता, उद्धव गीता, मंकि गीता, व्याध गीता जैसी अनेक गीताएं हैं। इसके अलावा गुरु गीता, अष्ट्रवक गीता, ...
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प्रभु श्रीराम ने अयोध्या से निकलकर लंका तक के सफर में जहां जहां पर अपने पग धरे वहां वहां के खास स्थानों पर मंदिर, कुंड या रामालय बन गए। निश्‍चित ही लंका से लौटने के बाद प्रभु श्रीराम ने अयोध्या में कई तरह के कार्य किए होंगे। जैसे शिवालय बनवाना, महल, ...
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गुहराज निषादजी ने अपनी नाव में प्रभु श्रीराम को गंगा के उस पार उतारा था। वे केवट थे अर्थात नाव खेने वाले। 15 मई 2021 को उनकी जयंती मनाई जाएगी। पंचांग भेद से चैत्र शुक्ल पंचमी को गुहराज निषादजी जयंती और वैशाख कृष्ण चतुर्थी को केवट समाज जयंती मनाई ...
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श्री कागभुशुंडी और गरुड़जी का संवाद हमें तुलसीदास द्वारा कृत रामचरित मानस के उत्तरकांड में मिलता है जिसमें श्री कागभुशुंडी ने मानस रोगों का वर्णन किया है और इन रोगों का कारण और निवारण भी बताया है। गरुड़जी ने उनसे सात प्रश्न किए थे जिसके कागभुशुंडी ...
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वाल्मीकि कृत रामायण में प्रभु श्रीराम की जीवन गाथा लिखी हुई है। श्री राम के भाई श्री लक्ष्मण एक माहान योद्धा थे। उन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है। वे स्वभाव में थोड़े उग्र थे। उनके इसी स्वभाव के कारण उनकी कुछ लोगों के साथ रोचक बहस हो जाती है। ...
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भारत में यह प्रचलित है कि प्रभु श्रीराम ने जैसा जीवन जिया, वैसा जिएं और भगवान श्रीकृष्ण ने जो कहा, उसे मानें अर्थात कोई भी व्यक्ति श्रीकृष्ण के जैसा जीवन नहीं जी सकता, लेकिन प्रभु श्रीराम के जैसा जीवन जी सकता है। प्रभु श्रीराम ने गीता नहीं कही, ...
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हनुमानजी के कई नाम है और हर नाम के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य है। हनुमानजी के लगभग 108 नाम बताए जाते हैं। वैसे प्रमुख रूप से हनुमानजी के 12 नाम बताए जाते हैं। बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ है हनुमानजी। कलिकाल में उन्हीं की भक्ति से भक्त का उद्धार होता है। जो ...
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हनुमानजी को जब लंका जाना था तब जामवंतजी ने उन्हें उनकी शक्तियों से परिचित कराया और वे फिर वायु मार्ग से लंका के लिए निकले। लंका के मार्ग और लंका में उन्होंने कई पराक्रम भरे कार्य किए। आओ जानते हैं उन्हीं में से 9 प्रमुख कार्य।
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अंजनीपुत्र हनुमानजी एक कुशल प्रबंधन थे। ज्ञान, बुद्धि, विद्या और बल के साथ ही उनमें विनम्रता भी अपार थी। सही समय पर सही कार्य करना और कार्य को अंजाम तक पहुंचाने का उनमें चमत्कारिक गुण था। आओ जानते हैं कि किस तरह उनमें कार्य का संपादन करने की अद्भुत ...
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श्री सीता हरण के बाद हनुमानजी और श्रीराम का मिलन हुआ और हनुमानजी ने श्रीराम को सुग्रीव, जामवंत आदि वानरयूथों से मिलाया। फिर जब लंका जाने के लिए रामसेतु बनाया गया तो श्रीराम ने हनुमानजी को लंका जाने का आदेश दिया, परंतु हनुमानजी ने लंका जाने में अपनी ...
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हनुमानजी ने लंका जाने में अपनी असमर्थता जताई तब जामवंतजी ने हनुमानजी को उनकी शक्तियों की याद दिलाई। परंतु सवाल यह है कि हनुमानजी अपनी शक्ति क्यों भूल गए थे?
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राम की गाथा वाल्मीकि रामायण अनुसार रावण महापंडित था। रावण बहुत ही ज्ञानी महापंडित होने के साथ ही ज्योतिष, वास्तु और विज्ञान का ज्ञान भी रखता था। आओ जानते हैं रावण रचित 13 ग्रंथों की सूची।
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विवस्वान (सूर्य) पुत्र वैवस्वत मनु और वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु के कुल में आगे चलकर भागीरथ, हरिश्चंद्र, सगर, पृथु, रघु आदि कई महान लोग हुए उसके बाद राजा दशरथ हुए। दशरथ की तीन पत्नियां थीं, कौशल्या, सुमित्रा, कैकयी।
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अयोध्या आगमन के बाद राम ने कई वर्षों तक अयोध्या का राजपाट संभाला और इसके बाद गुरु वशिष्ठ व ब्रह्मा ने उनको संसार से मुक्त हो जाने का आदेश दिया। एक घटना के बाद उन्होंने जल समाधि ले ली थी।
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शोध कुछ और कहते हैं और ग्रंथ कुछ और। हम क्या मानें? वाल्मीकि रामायण में उल्लेख मिलता है कि श्रीराम ने 11000 वर्ष तक अयोध्या में राज किया था। परंतु क्या बताई गई उम्र सही है या कि कालांतर में वाल्मीकि रामायण में कोई हेरफेर किया गया? सवाल कई है परंतु ...
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