Rakhi Celebration | सात वचन से बँधी सात राखियाँ
सात राखी : सात वचन
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WDइस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बाँधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें: यह राखी है प्यार, विश्वास, साथ, मुस्कान, सम्मान, स्वतंत्रता और क्षमा की।
प्यार की राखी : यह राखी सलमा-सितारें और मोतियों से नहीं सजी है। यह राखी, अपने मन के आँगन में खिलने वाले प्यार के मासूम फूल से बनी है। इसे बाँधने और बँधाने की यही शर्त है कि बहन और भाई दोनों यह कसम खाए कि उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा। हर मौसम, हर समय, हर परिस्थिति में उनके प्यार का फूल तरोताजा रहेगा। चाहे बहन पराए आँगन की तुलसी बन जाए, चाहे रूनझुन पायल छनकाती दुल्हन, भाई ले आए। रिश्तों का सौन्दर्य और सादगी बनी रहे, बची रहे। दिल की गहराई में बसा प्यार निरंतर बढ़ता रहे, फलता-फूलता रहे। यह राखी इस मंगल त्योहार पर यही कसम चाहती है। दोनों के बीच महकते प्यार का फूल पैसों की तपिश से कभी ना मुरझा पाए।
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WDअकारण एकदूजे पर अविश्वास की काली परत चढ़ने नहीं देंगे। अगर किसी एक से विश्वास की दीवार चटकती भी है तो उसकी परिस्थिति को उदार मन से समझने का प्रयास करेंगे। इस राखी को बाँधते हुए कसम लें कि एकदूजे का विश्वास बनेंगेऔर उसे संजोए रखेंगे।
साथ की राखी : 'चाहे सारी दुनिया तुम्हारे विरुद्ध हो तुम्हारा भाई हमेशा तुम्हारे साथ है।' यह अटूट सहारा देते शब्द सच्चे मन से हर बहन के अन्तर्मन में बैठे होने चाहिए। उसका यह भाव कि मेरा भाई है ना, और भाई का यह अहसास कि मेरी बहन सब संभाल लेगी,हर हाल में कायम रहे यही इस राखी को बाँधने की कोमल शर्त है। इस दुनिया में माँ और पिता के बाद भाई ही तो सच्चा निस्वार्थ साथ दे सकता है। देश का हर भाई अपनी बहन के साथ रहे एक अहसास बन कर, एक विश्वास बन कर तभी इस राखी की सार्थकता है।
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NDजब त्योहार आए तो दुरियों के पूल पार ना किए जा सके, होंठों की मुस्कान की जगह आँखों से रिश्ते बहने लगें या नफरत का आवेग कोपभवन के दरवाजे ना खोलने दें। इस राखी का यही कहना है कि वचन दो भाई-बहन दोनों सदैव एक-दूसरे की मुस्कान का ख्याल रखोगे।
सम्मान की राखी : इस राखी के साथ बँधी शर्त हर छोटे-बड़े भाई-बहन के लिए है। लड़ना-झगड़ना, मार-पीट, रूठना-मनाना सब चलें मगर कभी भी अपमान और तिरस्कार के बोल जुबान पर ना आए। रिश्तों की पवित्रता, परिवार की गरिमा और परस्पर सम्मान का भाव लिए यह राखी वचन चाहती है कि कभी अकेले में भी बहन या भाई का मान घटाने वाली बात ना कहें। एकदूजे को चिढ़ाना-खिजाना यह शायद हर भाई-बहन के रिश्ते की अनिवार्यता है लेकिन इनका एक सुनिश्चित ग्राफ जरूरी है।
एक नाजुक सीमारेखा यहाँ बाँधना आवश्यक है। रंग,रूप, कमजोरी, असफलता, असमर्थता शारीरिक गठन आदि पर उस सीमा तक ही टिप्पणी उचित है जिस सीमा तक स्वयं बर्दाश्त की जा सकें। मजाक मखौल ना बनें और परिहास, क्रूर हास में परिवर्तित ना हो इसका ध्यान रहे। हम एकदूजे को समुचित आदर देंगे। दीजिए वचन इस राखी को बाँधते हुए, बँधाते हुए।
स्वतंत्रता की राखी : यह राखी आज के आधुनिक भाई-बहन के लिए विशेष रूप से बनवाई गई है। युवा होते भाई-बहन के बीच इस राखी ने अपनी अनिवार्यता सिद्ध की है। बहन के दोस्त और भाई की सहेलियाँ आपस में कितने किस हद तक स्वतंत्र रहें, इस राखी को बाँध कर तय करें। मजाक नहीं, इसे दूसरे शब्दों में समझें। भाई होने के नाते तुम्हारा ख्याल रखना मेरी जिम्मेदारी है लेकिन हर बात पर शक नहीं करना मेरे आधुनिक होने की सही निशानी है। मैं एक भाई होने के नाते तुम्हें इतनी स्वतंत्रता देता हूँ कि तुम अपने या मेरे दोस्तों के बीच से जीवनसाथी चुन कर लाओ तो मैं उस निर्णय का सम्मान कर सकूँ।
अगर मुझे लगता है कि तुम्हारा चयन गलत है तो बिना आपा खोए तुम्हारे नजरिए से फैसले को देखने का प्रयत्न करूँ। लेकिन अपने निर्णय, अपनी मर्जी तुम पर थोपने के बजाय तुम्हारी मर्जी, तुम्हारी खुशी को स्वीकार करने की कोशिश करूँ। बहन होने के नाते मैं वचन देती हूँ कि तुम्हारी मित्र-सखियों से सम्मान से पेश आऊँगी। हर लड़की के साथ तुम्हारा नाम जोड़ने के बजाय दोस्ती को सहजता से लूँगी।
हम एकदूजे को इतनी स्वतंत्रता देंगे कि अपनी जिन्दगी के सुनहरे युवा लम्हें खुशियों के साथ बटोर सकें। मनोरंजन की हर परिभाषा हम दोनों के लिए एक होगी। तो बढ़ाओ हाथ इस दमकती स्पेशल राखी के लिए।
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NDयह राखी चाहती है कि अगर किसी बहन से कुछ ऐसा हुआ है जो समाज के नियमों के खिलाफ है तो भी भाई उसे क्षमा कर सकें। अगर भाई रास्ते से भटक गया हो तो बहन उसे क्षमादान दे सकें। प्यार से लेकर क्षमा तक की इन राखियों का बँधन चिरस्थायी रहे, इस शुभ पर्व पर यही कामना है।
