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जानिए क्या है कुम्भक प्राणायाम

Updated: शुक्रवार, 9 जून 2017 (18:04 IST)
किसी भी प्रकार का प्राणायाम करते वक्त तीन क्रिया करते हैं, रेचक, पूरक और कुम्भक। श्वास को अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक और बाहर रोकने की क्रिया को बाहरी कुम्भक कहते हैं। कुम्भक करते वक्त श्वास को अंदर खींचकर या बाहर छोड़कर रोककर रखा जाता है।
 
1.आंतरिक कुम्भक- इसके अंतर्गत नाक के छिद्रों से वायु को अंदर खींचकर जितनी देर तक श्वास को रोककर रखना संभव हो रखा जाता है और फिर धीरे-धीरे श्वास को बाहर छोड़ दिया जाता है।
 
2.बाहरी कुम्भक- इसके अंतर्गत वायु को बाहर छोड़कर जितनी देर तक श्वास को रोककर रखना संभव रोककर रखा जाता है और फिर धीरे-धीरे श्वास को अंदर खींचा लिया जाता है। 
 
मात्रा या अवधि- कुम्भक क्रिया का अभ्यास सुबह, दोपहर, शाम और रात को कर सकते हैं। कुम्भक क्रिया का अभ्यास हर 3 घंटे के अंतर पर दिन में 8 बार किया जा सकता है।
 
ध्यान रहे कि कुम्भक की आवृत्तियां शुरुआत में 1-2-1 की होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर यदि श्वास लेने में एक सैकंड लगा है, तो उसे दो सैकंड के लिए अंदर रोके और दो सैकंड में बाहर निकालें। फिर धीरे-धीरे 1-2-2, 1-3-2, 1-4-2 और फिर अभ्यास बढ़ने पर कुम्भक की अवधि और भी बढ़ाई जा सकती है। एक ओंकार उच्चारण में लगने वाले समय को एक मात्र माना जाता है। सामान्यतया एक सेकंड या पल को मात्रा कहा जाता है।
 
विशेषता- कुम्भक को अच्छे से रोके रखने के लिए जालंधर, उड्डियान और मूलबंध बंधों का प्रयोग भी किया जाता है। इससे कुम्भक का लाभ बढ़ जाता है। मूर्च्छा और केवली प्राणायाम को कुम्भक प्राणायाम में शामिल किया गया है।
 
लाभ- कुम्भक के अभ्यास से आयु की वृद्धि होती है। संकल्प और संयम का विकास होता है। भूख और प्यास कर कंट्रोल किया जा सकता है। इससे खून साफ होता है, फेफड़े शुद्ध-मजबूत होते हैं। शरीर कांतिमान बनता है। नेत्र ज्योति बढ़ती है। नकारात्मक चिंतन सकारात्मक बनता है तथा भय और चिंता दूर होते हैं।
 
सावधानी : दमा तथा उच्च-रक्तचाप के रोगी कुम्भक न लगाएँ। कुम्भक लगाने के पहले किसी योग विशेषज्ञ से सलाह ले लें।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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