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भलाई के अग्रदूत थे धर्मगुरु डॉ. सैयदना साहब

Updated: शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020 (15:05 IST)
Syedna Burhanuddin
 
दुनिया भर में फैले दाऊदी बोहरा समाज के प्रमुख धर्मगुरु डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का जन्म सूरत में सन् 1915 में हुआ था। उनके वालिद साहब हिज होलीनेस डॉ. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने यह फरमाया था कि उनका बेटा फातेमी दावत (इमाम का वह मिशन जो अल-दई-अल मुतलक द्वारा चलाया जाता है) के सम्मान तथा प्रतिष्ठा का अग्रदूत होगा। 
 
मात्र 13 वर्ष की अल्प आयु में अपने वालिद की देखरेख में ली गई तालीम के परिणाम स्वरूप सैयदना ने पूरी की पूरी कुरान-ए-मजीद को याद कर लिया था। 19 बरस की आयु में 51वें दई-अल-मुतलक सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने सैयदना को अल-दई-अल-मुतलक का वारिस मुकर्रर कर दिया था। 1941 में सैयदना को अल-अलीम-उर-रासिक का खिताब अता किया गया। साथ ही एक बरस बाद सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने उन्हें उमादातुल उलमा एल मुवाहेदीन का खिताब अता किया गया। यह दुर्लभ सम्मान है, जो समुदाय के सबसे ज्यादा विद्वान इंसान को ही दिया जाता है।
 
 
सैयदना साहब ने हजारों बोहराओं की नगरी तथा चार सदियों से दावत की गद्दी यमन की यात्रा की, जिसके परिणामस्वरूप यमन सरकार और वहां के लोगों ने बोहराओं को मान्यता प्रदान कर दी। इस महान उपलब्धि पर सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने अपने बेटे को 'मंसूर-उल-यमन' नामक ऐतिहासिक खिताब से नवाजा। यह खिताब इससे पहले एक मर्तबा बारह सदी पहले दिया गया था।
 
सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के इंतकाल होने पर सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन अल-दाइल-अल मुतलक की गद्दी पर 52वें गद्दीनशीन जलवा अफरोज हुए। अपने पूर्वजों और वालिद की परंपरा को अपनाते हुए सैयदना ने पहला रिसाला रमदानिया इस्तिफताहो जोबादिल मारिफ, जो कि अरब साहित्य की रचना है, लिखा।
 
दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी और सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिक्षण केन्द्र अल-अजहर यूनिवर्सिटी ऑफ कैरो, इजिप्ट ने सैयदना को डॉक्टर ऑफ इस्लामिक स्टडीज (सम्मानजनक कार्य के लिए) की उपाधि प्रदान की थी। सैयदना साहब ने सिखाया कि न कोई बड़ा है और न कोई छोटा बल्कि सब एक समान हैं। वे कहते थे कि सबका भला करो, गुस्सा मत करो, मीठा बोलो। उनका बताया रास्ता मानवता का रास्ता है। 
 
सैयदना साहब के व्यापक तथा उदारवादी मानवीय कार्यों के प्रति समस्त बोहरा समुदाय नतमस्तक हैं और हमेशा रहेगा। डॉ. सैयदना साहब श्रेष्ठतम मानवतावादी, शिक्षाविद और भलाई के अग्रदूत थे। डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब मानवता की मिसाल थे। उन्होंने बोहरा समाज को एक नई दिशा दी। दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेता डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का निधन दक्षिण मुंबई स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से 17 जनवरी 2014 को 98 वर्ष की आयु में हो गया था। ग्रेगोरी कालदर्शक के अनुसार वे 102 साल के थे।

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