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मंगल प्रदोष रखने से उतर जाता है कर्ज और मिट जाता है मर्ज

मंगलवार,सितम्बर 29, 2020
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मंगल (भौम) और प्रदोष का दिन शनि की साढ़ेसाती, मंगलजनित दोषों के निवारण, कर्जमुक्ति तथा अभीष्ट सिद्धि प्राप्ति के लिए यह दिन विशेष मायने रखता है।
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एक नगर में एक वृद्धा रहती थी। उसका एक ही पुत्र था। वृद्धा की हनुमानजी पर गहरी आस्था थी। वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमानजी की आराधना करती थी।
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मंगल-भौम प्रदोष व्रत :हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इसमें मंगलवार और शनिवार को आने वाले प्रदोष तिथि का विशेष महत्व माना गया है।
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हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्तमान में आश्विन माह में अधिक मास चला रहा है। अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो गया है और 16 अक्टूबर तक चलेगा। अश्विन माह इस बार 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक होगा। यह अवधि 59 दिनों की होगी। आओ जानते हैं अक्टूबर और अश्विन माह के 7 ...
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आश्विन माह और अधिक मास में आनेवाली श्री विनायक चतुर्थी 20 सितंबर 2020, रविवार को पड़ रही है। इस दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की विधि विधान से पूजा की जाती है।
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पौराणिक शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम (अधिक) मास में भगवान श्रीहरि व शिव जी, रामभक्त हनुमान का पूजन करना अत्यंत फलदायी है।
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी का रहस्य।
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी के संबंध में 8 रहस्य।
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अधिक (पुरुषोत्तम) मास शुरू हो गया है। यह महीना श्रीहरि विष्णुजी की उपासना का माना गया है। इन दिनों सच्चे मन से भगवान विष्णु का ध्यान, पूजन, मंत्र, श्लोक, धार्मिक पाठ, कथा और स्तोत्र, आरती,
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पंचांग के अनुसार आश्विन मास में पुरुषोत्तम (अधिक) मास 18 सितंबर से शुरू हो गया है और इस मास का समापन 16 अक्टूबर 2020 को होगा।
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मलमास, अधिक मास अर्थात पुरुषोत्तम मास (18 सितंबर 2020 से 16 अक्टूबर 2020) का महत्व, पौराणिक आधार क्या है
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भगवान ब्रह्मा के कहने पर विश्वकर्मा ने ये दुनिया बनाई थी। द्वारका से लेकर, भगवान शिव का त्रिशूल भी विश्वकर्मा जी ने बनाया है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी कहा जाता है। उन्हें संसार के पहले इंजीनियर और वास्तुकार के रूप में जाना जाता हैं। आज उनकी जयंती पर पढ़ें भगवान विश्वकर्मा के 108 नाम...
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विश्वकर्मा पूजा के दिन कुछ ऐसे भी कार्य हैं जिन्हें करना वर्जित माना गया है। आइए जानते हैं कि कौन से वो कार्य हैं जो विश्वकर्मा पूजा के दिन चाहिए...
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इस वर्ष 16 सितंबर 2020 को विश्वकर्मा पूजा की जाएगी। हर साल अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विश्वकर्मा पूजा की जाती है।
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26 अगस्त 2020 को प्रारंभ हुआ महालक्ष्मी व्रत का 10 सितंबर को समापन दिवस है। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से हर वर्ष महाराष्ट्रियन परिवारों सहित सभी उत्तर भारतीयों में महालक्ष्मी उत्सव का आरंभ होता है और अश्विन कृष्ण अष्टमी को इस व्रत का समापन होता है।
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सनातन धर्मावलंबियों में जिउतिया (जीमूतवाहन) व्रत का खास महत्व है। इस वर्ष यह व्रत 10 सितंबर 2020, गुरुवार को किया जाएगा।
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इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत 10 सितंबर 2020, बृहस्पतिवार को किया जाएगा। हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत किया जाता है।
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श्री महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से प्रारंभ किया जाता है। इस दिन स्नान करके 16 सूत के धागों का डोरा बनाएं, उसमें 16 गांठ लगाएं,
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