ramcharitmanas
✕

वट सावित्री व्रत : किसने 100 पुत्रों की मां बनने का मांगा था वरदान

Updated: गुरुवार, 21 मई 2020 (16:37 IST)
ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस व्रत में महिला वट वृक्ष की पूजा करती हैं, जिससे महिलाओं की अखंड सौभाग्य की कामना पूरी होती है।
 
वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु व डालियों व पत्तियों में भगवान शिव का निवास माना जाता है। 
 
वट सावित्री व्रत कथा : संक्षिप्त में वट सावित्री व्रत कथा सार है कि सावित्री के पति अल्पायु थे, उसी समय देव ऋषि नारद आए और सावित्री से कहने लगे, तुम्हारा पति अल्पायु है। आप कोई दूसरा वर देख लो। पर सावित्री ने जवाब दिया मैं हिंदू नारी हूं, पति तो एक ही बार चुनती हूं। इसी समय सत्यवान के सिर में अत्यधिक पीड़ा होने लगी। सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने गोद में पति के सिर को रख उसे लेटा दिया। उसी समय सावित्री ने देखा अनेक यमदूतों के साथ यमराज आ पहुंचे हैं। सत्यवान के जीव को दक्षिण दिशा की ओर लेकर चल गए हैं। सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल देती हैं। 
 
उन्हें आता देख यमराज ने कहा कि हे पतिव्रता नारी पृथ्वी तक ही पत्नी पति का साथ देती है। वापस लौट जाओ, इस पर सावित्री ने कहा कि जहां मेरे पति रहेंगे मुझे उनके साथ रहना है। यही मेरा पत्नी धर्म है। यमराज सावित्री के उत्तर सुन बड़े प्रसन्न हुए। उसने सावित्री को वर मांगने को कहा मैं तुम्हें तीन वर देता हू, बोलो तुम कौन-कौन से तीन वर लोगी। तब सावित्री ने सास-ससुर के लिए नेत्र ज्योति, ससुर का खोया हुआ राज्य एवं सत्यवान के 100 पुत्रों की मां बनना चाहती हूं। तीनों वरदान देते हुए यमराज ने कहा, ऐसा ही होगा। सावित्री उसी वट वृक्ष के पास लौट आई। जहां सत्यवान मृत पड़ा था। सत्यवान के मृत शरीर पर फिर से संचार हुआ। इस प्रकार सावित्री ने व्रत से न केवल अपने पति को फिर से जीवित करवाया बल्कि सास-ससुर को नेत्र ज्योति प्रदान करते हुए उनके ससुर का खोया हुआ राज्य फिर से दिलवाया। इस व्रत से सौभाग्यवती महिलाओं का सौभाग्य अखंड होता है और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।

ALSO READ: अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान देता है वट सावित्री व्रत...

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

शारदीय नवरात्रि 2026: महाअष्टमी और महानवमी की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं व्रत पारण

16 shradh paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में चतुर्थी के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्रद्ध

विजयादशमी 2026: कब है दशहरा, रावण दहन कब होगा?

16 shradh paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में तृतीया के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्राद्ध

अक्टूबर 2026 के ग्रह गोचर और नक्षत्र परिवर्तन सहित जानिए प्रमुख व्रत एवं त्योहार

अगला लेख