अखंड सौभाग्यवती रहने का वरदान देता है वट सावित्री व्रत...

Vat-savitri-vart-440

* वट सावित्री अमावस्या पर सुहागिनें मांगेंगी अखंड सुहाग का वरदान...
भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। वट सावित्री अमावस्या व्रत करने के पीछे ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वटवृक्ष की परिक्रमा करने पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश सुहागिनों को सदा सौभाग्यवती रहने का वरदान देते हैं। इस दिन गांवों-शहरों में हर कहीं जहां वटवृक्ष हैं, वहां सुहागिनों का समूह परंपरागत विश्वास से पूजा करता दिखाई देगा।
अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना के लिए वट सावित्री अमावस्या पर सुहागिनें वट सावित्री पूजा करती हैं। शहर-गांवों में कई स्थानों पर वटवृक्ष के नीचे सुहागिनों का तांता नजर आएगा। सुहाग की कुशलता की कामना के साथ सुहागिनें परंपरागत तरीके से वटवृक्ष की पूजा कर व्रत रखती है।
उनके द्वारा 24 पूड़ी, 24 पकवान और इतने ही प्रकार के फल व अनाज भी चढ़ाए जाएंगे। उसके बाद वटवृक्ष को धागा लपेटकर पूजा करके पति की लंबी उम्र की कामना की जाएगी। इस दिन महिलाएं वट के पेड़ की पूजा-अर्चना कर अखंड सुहाग का वर मांगेंगी। पूजा के लिए घर से सज-धजकर निकलीं सुहागिनें वटवृक्ष के नीचे कतारबद्ध रूप में पूजन करती दिखाई देंगी।

कई जगहों पर वट की पूजा के लिए महिलाएं घरों से ही गुलगुले, पूड़ी, खीर व हलुए के साथ सुहाग का सामान लेकर पहुंचेंगी। कहीं-कहीं जल, पंचामृत भी लेकर जाएंगी, जहां वे वटवृक्ष के 3 या 5 फेरे लगाकर कच्चे धागे को पेड़ पर लपेटकर वस्त्र सहित चंदन, अक्षत, हल्दी, रोली, फूलमाला, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी इन्हें पहनाकर पति की लंबी उम्र के लिए वट से आशीर्वाद प्राप्त करेंगी।
ये हैं कहानी - वट अमावस्या के पूजन की प्रचलित कहानी के अनुसार सावित्री अश्वपति की कन्या थी, उसने सत्यवान को पति रूप में स्वीकार किया था। सत्यवान लकड़ियां काटने के लिए जंगल में जाया करता था। सावित्री अपने नेत्रहीन सास-ससुर की सेवा करके सत्यवान के पीछे जंगल में चली जाती थी।

एक दिन सत्यवान को लकड़ियां काटते समय चक्कर आ गया और वह पेड़ से उतरकर नीचे बैठ गया। उसी समय भैंसे पर सवार होकर यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। सावित्री ने उन्हें पहचाना और सावित्री ने कहा कि आप मेरे सत्यवान के प्राण न लें। लेकिन यमराज नहीं माने और वे सत्यवान के प्राण हरकर जाने लगे। सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी व यमराज से सत्यवान के प्राण लौटाने की प्रार्थना करने लगी।

यमराज ने मना किया व वापस लौटने को कहा, मगर वह वापस नहीं लौटी। आखिरकार सावित्री के पतिव्रत धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने वर रूप में अंधे सास-ससुर की सेवा में आंखें दीं और सावित्री को 100 पुत्र होने का आशीर्वाद दिया और सत्यवान को छोड़ दिया। वट पूजा से जुड़ी हुई धार्मिक मान्यता के अनुसार ही तभी से महिलाएं इस दिन को वट अमावस्या के रूप में पूजती हैं।





वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

आध्यात्मिक क्रां‍ति की पहली चिंगारी थे महर्षि अरविन्द

आध्यात्मिक क्रां‍ति की पहली चिंगारी थे महर्षि अरविन्द
महर्षि अरविन्द आध्यात्मिक क्रां‍ति की पहली चिंगारी थे। वे बंगाल के महान क्रांतिकारियों ...

साईं बाबा ने जब कहा, 'गेरू लाओ, आज भगवा वस्त्र रंगेंगे'

साईं बाबा ने जब कहा, 'गेरू लाओ, आज भगवा वस्त्र रंगेंगे'
नासिक के प्रसिद्ध ज्योतिष, वेदज्ञ, 6 शास्त्रों सहित सामुद्रिक शास्त्र में भी पारंगत मुले ...

जानिए कैसा है सूर्य का स्वभाव, क्या पड़ता है आप पर इसका ...

जानिए कैसा है सूर्य का स्वभाव, क्या पड़ता है आप पर इसका प्रभाव
ज्योतिष में जन्मपत्रिका, बारह राशियों एवं नौ ग्रहों का विशेष महत्व है. .. ये नौ ग्रह ...

कैसे चल रहे हैं प्रधानमंत्री के सितारे, जानिए मोदी के लिए ...

कैसे चल रहे हैं प्रधानमंत्री के सितारे, जानिए मोदी के लिए कैसा होगा आने वाला समय ?
जन्मपत्रिका के माध्यम से किसी भी जातक का अतीत, वर्तमान और भविष्य बताया जा सकता है, फिर ...

वह स्थान जहां से हुआ था रुक्मिणी का हरण और श्रीकृष्ण की ...

वह स्थान जहां से हुआ था रुक्मिणी का हरण और श्रीकृष्ण की पुत्री भी थीं, जानिए रहस्य
श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का जिस मंदिर से हरण किया था। वह मंदिर वर्तमान में मौजूद है। इस ...

इस साल क्या है रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, ...

इस साल क्या है रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, क्या धनिष्ठा पंचक बनेगा रूकावट
रक्षाबंधन का त्योहार इस वर्ष 26 अगस्त को है। इस साल अच्छी बात यह है कि राखी के दिन भद्रा ...

रक्षाबंधन में नहीं है भद्रा का दोष, ऐसे सजाएं राखी की थाली ...

रक्षाबंधन में नहीं है भद्रा का दोष, ऐसे सजाएं राखी की थाली अपने भाई के लिए
हिन्दू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 59 मिनट से आरंभ होकर शाम 5 ...

कब होगा भगवान विष्णु का कल्कि अवतार?

कब होगा भगवान विष्णु का कल्कि अवतार?
पुराणों में कल्कि अवतार के कलियुग के अंतिम चरण में आने की भविष्यवाणी की गई है। अभी कलियुग ...

घर की कौनसी दिशा बदल सकती है आपकी दशा, जानिए वास्तु के ...

घर की कौनसी दिशा बदल सकती है आपकी दशा, जानिए वास्तु के अनुसार
चारों दिशाओं से सुख-संपत्ति और सम्मान पाना है तो जानें वास्तु के अनुसार कैसी हो भवन की ...

समस्त पापों से मुक्ति देता है शिव महिम्न स्तोत्र, श्रावण ...

समस्त पापों से मुक्ति देता है शिव महिम्न स्तोत्र, श्रावण में अवश्य पढ़ें... (हिन्दी अर्थसहित)
श्रावण मास के विशेष संयोग पर भगवान शिव को पुष्पदंत द्वारा रचित शिव महिम्न स्तोत्र से ...

राशिफल