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गणेश पूजा में क्यों नहीं करते तुलसी दल अर्पण, पढ़ें पौराणिक कथा

शनिवार,नवंबर 17, 2018
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गुरु नानक देवजी सिख धर्म के संस्थापक ही नहीं, अपितु संपूर्ण सृष्टि के जगद्गुरु थे। 'नानक शाह फकीर। हिन्दू का गुरु, ...
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इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देने वाला होता है। अर्थात् उसके शुभ फल में कभी कमी नहीं आती।
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एक राजा था, उसका प्रण था वह रोज सवा मन आंवले दान करके ही खाना खाता था। इससे उसका नाम आंवलया राजा पड़ गया।
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फूल, पुष्प, सुमन, कुसुम मंजरी, प्रसून, गुल और फ्लॉवर्स जैसे विविध शब्दों से हम जिन्हें संबोधित करते हैं उनके ख्याल ...
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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गाय सृष्टिमातृका कही जाती है। गाय के रूप में पृथ्वी की करुण पुकार और विष्णु से अवतार के लिए ...
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पौराणिक मान्यताओं व श्रुतियों के अनुसार, गौएं साक्षात विष्णु रूप है, गौएं सर्व वेदमयी और वेद गौमय है। भगवान श्रीकृष्ण ...
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गोपाष्टमी मनाने की पौराणिक कथा- भगवान ने जब छठे वर्ष की आयु में प्रवेश किया तब एक दिन भगवान माता यशोदा से बोले- मैय्या ...
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पूजा के समय कलाई में या गर्दन पर हल्दी का छोटा सा टीका लगाने पर बृहस्पति मजबूत होता है और वाणी में मजबूती आती है।
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प्रतिवर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सहस्रबाहु जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म महाराज हैहय की 10वीं ...
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नर्मदा नदी के तट पर महिष्मती (महेश्वर) नरेश हजार बाहों वाले सहस्रबाहु अर्जुन और दस सिर वाले लंकापति रावण युद्धरत थे।
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चाणक्य का व्यक्तित्व सभी के लिए अनुकरणीय एवं आदर्श है। चाणक्य नीति हम सभी के लिए बहुत उपयोगी है। आइए जानते हैं चाणक्य ...
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महाभारत ग्रंथ विचित्र और रोचक बातों से भरा है। बहुत कम लोग ही इस ग्रंथ की रोचक बातों को जानते हैं। आओ यहां जानते हैं ...
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प्रतिवर्ष कार्तिक मास की पंचमी तिथि को पांडव पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष पांडव पंचमी सोमवार, 12 नवंबर ...
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एक बार राजा पांडु अपनी दोनों पत्नियों कुंती तथा माद्री के साथ आखेट के लिए वन में गए। वहां उन्हें एक मृग का मैथुनरत ...
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द्रौपदी को इस बात को लेकर कष्ट होता रहता था कि अर्जुन अपनी अन्य पत्नियों सुभद्रा, उलूपी, चित्रांगदा से प्रेमव्यवहार में ...
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विश्वामित्र वैदिक काल के विख्यात ऋषि थे। उनके ही काल में ऋषि वशिष्ठ थे जिसने उनकी अड़ी चलती रहती थी, अड़ी अर्थात ...
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ब्रह्मर्षि वशिष्ठ अपनी सहधर्मिणी अरुंधती से कह रहे थे, देवी! ऋषि विश्वामित्र के यहां जाकर जरा-सा नमक मांग लाओ।
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शिरडी के साईं बाबा के अनमोल वचन जो उन्होंने विभिन्न अवसरों पर कहे थे। कहते हैं कि जो भी शिरडी के साईं बाबा को दिल से ...
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भगवान महावीर का संपूर्ण जीवन तप और ध्यान की पराकाष्ठा है इसलिए वह स्वतः प्रेरणादायी है। भगवान के उपदेश जीवनस्पर्शी हैं ...
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