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7 फरवरी को रथ सप्तमी, पढ़ें पौराणिक कथा और 13 काम की बातें

Updated: शनिवार, 5 फ़रवरी 2022 (13:52 IST)
माघ शुक्ल सप्तमी को रथ सप्तमी (Ratha Saptami 2022) या अचला सप्तमी व्रत किया जाता है। यह व्रत सूर्यदेव को समर्पित है। माघी सप्तमी के दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान सूर्यदेव का पूजन (Sun Worship) करती हैं। इस दिन व्रत रखने से महिलाओं को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस बार सोमवार, 7 फरवरी 2022 (Ratha Saptami Date 2022) को रथ सप्तमी मनाई जाएगी। इस दिन माघ सप्तमी की यह कथा पढ़ी और सुनी जाती है। 
 
माघी सप्तमी की पौराणिक कथा (Ratha Saptami Katha) के अनुसार, एक गणिका नाम की महिला ने अपने पूरे जीवन में कभी कोई दान-पुण्य का कार्य नहीं किया था। जब उस महिला का अंत काल आया तो वह वशिष्ठ मुनि के पास गई। महिला ने मुनि से कहा कि मैंने कभी भी कोई दान-पुण्य नहीं किया है तो मुझे मुक्ति कैसे मिलेगी। 
 
मुनि ने कहा कि माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी है। इस दिन किसी अन्य दिन की अपेक्षा किया गया दान-पुण्य का हजार गुना प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर भगवान सूर्य को जल दें और दीप दान करें तथा दिन में एक बार बिना नमक के भोजन करें। 
 
ऐसा करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है। गणिका ने वशिष्ठ मुनि द्वारा बताई हर बात का सप्तमी के दिन व्रत और विधिपूर्वक कार्य किया। कुछ दिन बाद गणिका ने शरीर त्याग दिया और उसे स्वर्ग के राजा इंद्र की अप्सराओं का प्रधान बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 
 
इस दिन क्या करें जानिए-Ratha Saptami 2022
 
1. इस दिन सबसे पहले प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें।

 
2. फिर विधिविधान से सूर्यदेव का पूजन-अर्चन करें। 
 
3. इस दिन स्नान और अर्घ्य दान करने से आयु, आरोग्य व संपत्ति की प्राप्ति होती है।
 
4. रथ सप्तमी के दिन दान-पुण्य का बहुत महत्व है, यह हजार गुना फल देने वाला माना गया है। 
 
5. इस दिन भगवान सूर्य (Sun Worship on Ratha Saptami) को प्रसन्न करने के लिए उनकी उपासना की जाती है।

 
6. मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्यदेव अपने दिव्य प्रकाश के साथ अवतरि‍त हुए थे, अत: इस दिन सूर्य आराधना का विशेष महत्व है। 
 
7. भगवान सूर्य देव ने इसी दिन अपना प्रकाश प्रकाशित किया था। इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है। इस दिन सूर्यदेव के मंत्र, पाठ, स्तोत्र आदि पढ़ना पुण्यफलदायी माना जाता है।
 
8. माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अर्क सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी, अचला सप्तमी, माघी सप्तमी, सूर्य जयंती, रथ सप्तमी और भानु सप्तमी आदि भी कहा जाता है। अत: इस दिन अच्छे आरोग्य की कामना से यह व्रत करना चाहिए।
 
 
9. इस दिन केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए। 
 
10. इस दिन माघ मास का कल्पवास कर रहे श्रद्धालुओं को सूर्यास्त के स्नान से पहले आक और बेर के 7 पत्तों को तेल से भरे दीपक में रखकर अपने सिर के ऊपर से घुमाकर पुण्यसलिला नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। तत्पश्चात स्नान करना चाहिए। 
 
11. कल्पवास कर रहे भक्तों को नदी में दीपक प्रवाहित करने से पहले ‘नमस्ते रुद्ररूपाय, रसानां पतये नम:। वरुणाय नमस्तेस्तु’ मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। 
 
12. तत्पश्चात भगवान भास्कर की आरती करनी चाहिए। 
 
13. रथ आरोग्य सप्तमी, अचला सप्तमी के दिन नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 

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Sun Worship

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