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बसौड़ा पर्व : ये हैं शीतला माता को प्रसन्न करने की पौराणिक कथा

Updated: शनिवार, 18 मार्च 2017 (12:35 IST)
* शीतला सप्तमी विशेष : शीतला माता की कथा, आरती एवं पूजन विधि... 

चैत्र कृष्ण सप्तमी और चैत्र कृष्ण अष्टमी के दिन शीतला माता का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शीतल माता की कहानी शीतला सप्तमी-अष्टमी की पूजा करने के बाद सुनी जाती है। इससे पूजा का सम्पूर्ण फल मिलता है। पढ़ें शीतला की कहानी - 


 

लोक किंवदंतियों के अनुसार बसौड़ा की पूजा माता शीतला को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इस कथा के अनुसार कि एक बार किसी गांव में गांववासी शीतला माता की पूजा-अर्चना कर रहे थे तो मां को गांववासियों ने गरिष्ठ भोजन प्रसादस्वरूप चढ़ा दिया। 

शीतला सप्तमी : मां शीतला के पूजन का पर्व
 
शीतलता की प्रतिमूर्ति मां भवानी का गर्म भोजन से मुंह जल गया तो वे नाराज हो गईं और उन्होंने कोपदृष्टि से संपूर्ण गांव में आग लगा दी। बस केवल एक बुढि़या का घर सुरक्षित बचा हुआ था। 

आरती : जय शीतला माता
 
गांव वालों ने जाकर उस बुढ़िया से घर न जलने के बारे में पूछा तो बुढि़या ने मां शीतला को गरिष्ठ भोजन खिलाने वाली बात कही और कहा कि उन्होंने रात को ही भोजन बनाकर मां को भोग में ठंडा-बासी भोजन खिलाया। जिससे मां ने प्रसन्न होकर बुढ़िया का घर जलने से बचा लिया। 

शीतला चालीसा- जय जय माता शीतला
 
बुढ़िया की बात सुनकर गांव वालों ने मां शीतला से क्षमा मांगी और रंगपंचमी के बाद आने वाली सप्तमी के दिन उन्हें बासी भोजन खिलाकर मां का बसौड़ा पूजन किया। हिन्दू व्रतों में केवल यही व्रत ऐसा है जिसमें बासी भोजन किया जाता है।

कैसे मनाएं बसौड़ा पर्व, जानिए 8 काम की बातें...
 
इस दिन मां शीतला का पूजन करने से माता अपने भक्तों को धन-धान्य से परिपूर्ण कर, उनके संतानों को लंबी आयु देती है तथा हर भक्त प्राकृतिक विपदाओं से दूर रखती हैं।
 

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