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Sat, 22 Aug 2026

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शीतला सप्तमी : मां शीतला के पूजन का पर्व

Goddess Sheetala
मां शीतला का पर्व किसी न किसी रूप में देश के हर कोने में मनाया जाता है। विशेष कर चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को शीतला सप्तमी और अष्टमी को शीतलाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को बसोरा (बसौड़ा) भी कहते हैं। बसोरा का अर्थ है बासी भोजन। शीतला माता हर तरह के तापों का नाश करती हैं और अपने भक्तों के तन-मन को शीतल करती हैं।

हिंदू व्रतों में केवल शीतला सप्तमी अथवा शीतलाष्टमी का व्रत ही ऐसा है जिसमें बासी भोजन किया जाता है। इसका विस्तृत उल्लेख पुराणों में मिलता है। शीतला माता का मंदिर वटवृक्ष के समीप ही होता है। शीतला माता के पूजन के बाद वट का पूजन भी किया जाता है।

ऐसी प्राचीन मान्यता है कि जिस घर की महिलाएं शुद्ध मन से इस व्रत को करती है, उस परिवार को शीतला देवी धन-धान्य से पूर्ण कर प्राकृतिक विपदाओं से दूर रखती हैं।
 
इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख देते हैं। फिर दूसरे दिन प्रात:काल महिलाओं द्वारा शीतला माता का पूजन करने के बाद घर के सब व्यक्ति बासी भोजन को खाते हैं।

कहते हैं कि नवरात्रि के शुरू होने से पहले यह व्रत करने से मां के वरदहस्त अपने भक्तों पर रहते हैं। जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो उसे यह व्रत नहीं करना चाहिए।