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Sankashti Chaturthi 2021: संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत प्रारंभ और पारण समय

Updated: मंगलवार, 30 मार्च 2021 (16:05 IST)
31 मार्च, बुधवार 2021 को है संकष्टी (Sankashti Chaturthi 2021) चतुर्थी प्रारंभ होगी जो 1 अप्रैल तक जारी रहेगी। प्रत्येक माह में 2 चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक 3 वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग अलग है। हर माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को Vinayak Chaturthi मनाई जाती है। अमावस्या के बाद वाली चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद वाली चतुर्थी को Sankashti Chaturthi कहा जाता है।
 
 
यदि चतुर्थी गुरुवार को हो तो मृत्युदा होती है और शनिवार की चतुर्थी सिद्धिदा होती है और चतुर्थी के 'रिक्ता' होने का दोष उस विशेष स्थिति में लगभग समाप्त हो जाता है। चतुर्थी तिथि की दिशा नैऋत्य है। चतुर्थी (चौथ) के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं। तिथि 'रिक्ता संज्ञक' कहलाती है। अतः इसमें शुभ कार्य वर्जित रहते हैं।
 
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त :
1. चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 31 मार्च 2021 बुधवार दोपहर 2 बजकर 8 मिनट से शुरू।
 
2. चतुर्थी तिथि समाप्त: 1 अप्रैल 2021 गुरुवार सुबह 11 बजे तक।
 
3. चन्द्रोदय : बुधवार रात 9 बजकर 11 मिनट पर होगा।
 
4. चैत्र कृष्ण पक्ष की उदया तिथि तृतीया और दिन बुधवार है। तृतीया तिथि दोपहर 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी, जो शुक्रवार दोपहर पहले 11 बजे तक रहेगी। 
 
5. संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत का पारण चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय के बाद ही किया जाता है। अत: 1 अप्रैल रात 9 बजकर 11 मिनट बाद ही पारण होगा। यह व्रत सुबह से लेकर शाम को चन्द्रोदय तक रखा जाता है, उसके बाद व्रत का पारण कर लिया जाता है।
 
6. इस तिथि में भगवान गणेश के पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। संकष्टी चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी। इस दिन जो व्रत रखता है उसके संकटों का नाश हो जाता है। 
 
7. चतुर्थी के व्रतों के पालन से संकट से मुक्ति तो मिलती ही है साथ ही आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है। संकष्टी के दिन गणपति की पूजा करने से घर से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और शांति बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि गणेश जी घर में आ रही सारी विपदाओं को दूर करते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।
 
श्रीगणेश को दूर्वा अर्पण करने का मंत्र
'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।'

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