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राधारानी की अष्टसखियां कौन थीं, पढ़ें रोचक जानकारी

Updated: सोमवार, 17 सितम्बर 2018 (11:47 IST)
17 सितंबर 2018 भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीजी राधारानी का प्राकट्योत्सव है। श्रीराधारानी ने गोप वृषभानु एवं गोपी कीर्तिदा के यहां बरसाने में जन्म लिया था। ब्रज में ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की कृपा और श्रीधाम वृन्दावन में निवास श्रीजी राधारानी की अनुकंपा के बिना संभव नहीं है। 
 
योगेश्वर भगवान कृष्ण के सखाओं की भांति श्रीराधारानी की भी अनेक सखियां थीं। जिन्हें सखी, नित्यसखी, प्राणसखी व प्रियसखी कहा जाता है किन्तु इनके अतिरिक्त श्रीजी राधारानी की आठ सखियां थीं जो "अष्टसखी" के नाम से सुविख्यात थीं। 
 
जिनमें ललितासखी प्रमुख थीं। तानसेन के गुरू स्वामी हरिदास जी को ललितासखी का पुनर्जन्म माना जाता है। लेकिन क्या आप श्रीजी राधारानी की इन अष्टसखियों के नाम जानते हैं! यदि नहीं, तो आज हम श्रीजी राधारानी की अष्टसखियों की जानकारी अपने पाठकों को देंगे। श्रीमदभागवत, भक्तमाल आदि ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की अष्टसखियों के नाम हैं-
1. ललिता 
2. विशाखा
3. चित्रा
4. इंदुलेखा
5. चंपकलता
6. रंगदेवी
7. तुंगविद्या
8. सुदेवी
राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन में इन अष्टसखियों का मंदिर भी स्थित है।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमंत रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केंद्र 
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com

 
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लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें

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