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ओणम पर्व : क्यों है खास, जानिए 7 विशेष बातें...

Updated: बुधवार, 14 सितम्बर 2016 (11:15 IST)
* राजा बलि की आराधना का दिन
 

 
भार‍त विविध धर्मों, जातियों तथा संस्कृतियों का देश है। भारत भर के उत्सवों एवं पर्वों का विश्व में एक अलग स्थान है। सर्वधर्म समभाव के प्रतीक केरल प्रांत का मलयाली पर्व 'ओणम' समाज में सामाजिक समरसता की भावना, प्रेम तथा भाईचारे का संदेश पूरे देश में पहुंचा कर देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। 
 
प्राचीन मान्यता है कि राजा बलि ओणम के दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। उन्हें यह सौभाग्य भगवान विष्णु से मिला था। उसके चलते समाज के लोग विष्णु की आराधना और पूजा करने के साथ ही अपने राजा का स्वागत करते हैं। 
 

आगे पढ़ें ओणम पर्व पर क्या-क्या होता है... 

 

 

ओणम पर्व पर क्या-क्या होता है खास... 
 
* ओणम पर्व पर राजा बलि के स्वागत के लिए घरों की आकर्षक साज-सज्जा के साथ तरह-तरह के पकवान बनाकर उनको भोग अर्पित करती है। 
 
* इसके साथ ही ओणम नई फसल के आने की खुशी में भी मनाया जाता है। 
 
* हर घर के सामने रंगोली सजाने और दीप जलाने की भी परंपरा हैं।
 
*  हर घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं। खास तौर पर चावल, गुड़ और नारियल के दूध को मिलाकर खीर बनाई जाती है। 
 
* इसके साथ ही कई तरह की सब्जियां, सांभर आदि भी बनाया जाता है। 
 
* इस अवसर पर मलयाली समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर शुभकामनाएं देते हैं। साथ ही परिवार के लोग और रिश्तेदार इस परंपरा को साथ मिलकर मनाते हैं। 
 
* ओणम पर्व की मान्यता : इस पर्व की ऐसी मान्यता है कि राजा बलि केरल के राजा थे, उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी व संपन्न थी, किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं थी, वे महादानी भी थे। उन्होंने अपने बल से तीनों लोकों को अपने कब्जे में ले लिया था। इसी दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर आए और तीन पग में उनका पूरा राज्य लेकर उनका उद्धार कर दिया। 
 
माना जाता है कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा को देखने के लिए आते हैं। तब से केरल में हर साल राजा बलि के स्वागत में ओणम का पर्व मनाया जाता है।
 

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