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माघ पूर्णिमा के दिन करें 10 में से कोई एक दान, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

Written By WD Feature Desk
Updated: शनिवार, 31 जनवरी 2026 (17:07 IST)
Magh purnima ka daan: माघ पूर्णिमा पर किया गया दान न केवल पुण्य बढ़ाता है, बल्कि कुंडली के कई दोषों को भी शांत करता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान 'अक्षय' (जिसका कभी क्षय न हो) बन जाता है। माघ पूर्णिमा पर दान का महत्व शास्त्रों में 'अश्वमेध यज्ञ' के समान बताया गया है। यहाँ 10 विशेष महादान और उनके गहरे आध्यात्मिक व ज्योतिषीय लाभ दिए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन दान करने से व्यक्ति के पितृ तृप्त होते हैं और सात जन्मों के पापों का शमन होता है।  
 

1. तिल और गुड़ (सूर्य-शनि दोष निवारण)

माघ के महीने में तिल का दान स्वर्णाभूषणों के दान के समान माना गया है। तिल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं और गुड़ सूर्य का प्रतीक है। इनका दान करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्ट कम होते हैं।
 

2. ऊनी वस्त्र और कंबल (राहू-केतु शांति)

कड़ाके की ठंड में जरूरतमंदों को कंबल या गर्म कपड़े देना न केवल मानवता है, बल्कि यह राहू-केतु के अशुभ प्रभाव को भी शांत करता है। मान्यता है कि इससे पितृ प्रसन्न होकर वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
 

3. अन्न दान (अक्षय पुण्य)

चावल, गेहूं या सात प्रकार के अनाजों का दान सबसे बड़ा दान 'महादान' कहलाता है। इससे घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और मां अन्नपूर्णा का वास सदैव बना रहता है।
 

4. घी और शहद (आरोग्य प्राप्ति)

शुद्ध देसी घी और शहद का दान करने से व्यक्ति को शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष में इसे सूर्य और मंगल की शुभता से जोड़ा जाता है, जो ओज और तेज प्रदान करता है।
 

5. दूध और चांदी (चंद्र दोष मुक्ति)

यदि आपको मानसिक तनाव रहता है या माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, तो दूध या चांदी की वस्तु का दान करें। इससे चंद्रमा मजबूत होता है और मन में शांति का वास होता है।
 

6. विद्या/पुस्तकों का दान (बुध और गुरु कृपा)

किसी निर्धन छात्र को पुस्तकें, कलम या शिक्षा सामग्री दान करने से मां सरस्वती, बृहस्पतिदेव और बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है। यह दान आपके बच्चों की बुद्धि कुशाग्र करने में सहायक होता है।
 

7. जल और कलश दान

पूर्णिमा के दिन शीतल जल से भरे पात्र या घड़े का दान करना अत्यंत शुभ है। यह प्यासे की प्यास बुझाने के साथ-साथ कुंडली के 'विष योग' के प्रभाव को कम करता है।
 

8. जूते और छाता दान

पुराणों के अनुसार, मार्ग में चलने वाले निर्धन व्यक्तियों को जूते या छाता दान करने से यमलोक के मार्ग में कष्ट नहीं होता और पितरों को असीम शांति मिलती है।
 

9. फलों का दान

ऋतु अनुसार फलों का दान (जैसे केला, संतरा) करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और गुरु ग्रह प्रबल होता है।
 

10. दक्षिणा (यदि सामर्थ्य हो)

किसी भी दान की पूर्णता 'दक्षिणा' के बिना नहीं होती। ब्राह्मण या असहाय को कुछ सिक्के या धन दान करना आपकी पूजा को सफल बनाता है। यथाशक्ति गरीबों को दान करें।
 

विशेष टिप: दान करते समय क्या बोलें?

दान देते समय मन में "इदं न मम" (यह मेरा नहीं है, ईश्वर का है) का भाव रखें। इससे अहंकार का नाश होता है और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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