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Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 17 जनवरी 2026 (15:44 IST)

Thai Amavasai 2026: क्या है थाई अमावसाई, इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है?

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Thai Amavasai Tamil Nadu: थाई अमावसाई तमिल कैलेंडर के अनुसार 'थाई' महीने अर्थात् जनवरी-फरवरी में आने वाली अमावस्या को कहा जाता है। हिंदू धर्म, विशेषकर तमिलनाडु में, इस दिन का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। यह दिन मुख्य रूप से पितृ तर्पण, पूर्वजों को याद करने और उन्हें जल अर्पित करने के लिए समर्पित है।ALSO READ: मौनी अमावस्या पर 4 ग्रहों की युति, 7 कार्य करेंगे तो होगा चमत्कार
 
थाई अमावसाई दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र दिन है। हिंदू धर्म में इस दिन का आध्यात्मिक और पितृ पक्ष की दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व है। साल 2026 में थाई अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जा रही है।
 
थाई अमावसाई का महत्व: थाई अमावसाई तमिल कैलेंडर के थाई महीने में आने वाली अमावस्या तिथि को कहा जाता है, जिसे तमिलनाडु में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। यह दिन विशेष रूप से पितृ तर्पण, श्राद्ध, पिंड दान और पूर्वजों की शांति के लिए समर्पित माना जाता है।

तमिल कैलेंडर के अनुसार, 'थाई' वह महीना है जब सूर्य देव उत्तरायण यानी उत्तर की ओर गमन की यात्रा शुरू कर चुके होते हैं। उत्तरायण के दौरान आने वाली यह पहली अमावस्या होती है, इसलिए इसे पूर्वजों का आशीर्वाद लेने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। 
 
इस दिन क्या करते हैं?, जानें परंपराएं और विधि: इस दिन मुख्य रूप से पितृ तर्पण और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। इसकी प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं...ALSO READ: माघ मास की मौनी अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के सबसे खास 7 उपाय
 
पितृ तर्पण: लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र नदियों, समुद्र या जलाशयों के किनारे तर्पण और 'थिला तर्पणम' यानी तिल के साथ जल अर्पण करते हैं।
 
पवित्र स्नान: इस दिन रामेश्वरम, कन्याकुमारी, धनुषकोडि और कावेरी नदी के तट पर स्नान करना बहुत फलदायी माना जाता है। रामेश्वरम के 'अग्नि तीर्थम' में स्नान का विशेष महत्व है। इस अवसर पर तमिलनाडु में रामेश्वरम, तिरुचिरापल्ली (श्रीरंगम) और तिरुचेंदूर जैसे इन विशेष स्थानों पर थाई अमावसाई के दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
 
उपवास : कई लोग इस दिन पूर्ण उपवास रखते हैं या केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
 
दान-पुण्य: पितरों की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दान की जाती है।
 
गौ सेवा: इस दिन गायों को अगथी की पत्तियां या चारा खिलाना बहुत शुभ माना जाता है।
 
मंदिर दर्शन: तर्पण के बाद लोग शिव मंदिरों या विष्णु मंदिरों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।ALSO READ: मौनी अमावस्या की पौराणिक कथा Mauni Amavasya Katha
 
इस दिन के लाभ: 
 
* पितृ दोष से मुक्ति: माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से तर्पण करने से पितृ दोष समाप्त होता है।
 
* वंश वृद्धि और सुख: पूर्वजों के आशीर्वाद से परिवार में खुशहाली, संतान सुख और समृद्धि आती है।
 
* बाधाओं का निवारण: जीवन में आ रही अनचाही रुकावटें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
 
* थाई अमावसाई पर तर्पण: ऐसी मान्यता है कि जो लोग नियमित रूप से श्राद्ध नहीं कर पाते, वे यदि थाई अमावसाई पर तर्पण करें, तो उन्हें 'पितृ दोष' से मुक्ति मिलती है।
 
* अच्छा भविष्य: यह परिवार में शांति, बाधाओं को दूर करने और आने वाली पीढ़ी के अच्छे भविष्य के लिए किया जाता है।

थाई अमावस्या पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: Thai Amavasai 2026 FAQs
 
Q. थाई अमावस्या कब मनाई जाती है?
 
A. थाई अमावस्या विशेष रूप से तमिल पंचांग के अनुसार, हर वर्ष माघ माह की अमावस्या को मनाई जाती है। यह आम तौर पर जनवरी-फरवरी के बीच होती है।
 
Q. थाई अमावस्या का महत्व क्या है?
 
A. थाई अमावस्या का महत्व विशेष रूप से पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण (पितृ पूजन) के रूप में है। इस दिन लोग अपने पितरों के आत्मा की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करते हैं। इसे पितृ दोष निवारण का दिन भी माना जाता है।
 
Q. थाई अमावस्या पर कौन से कार्य किए जाते हैं?
 
A. 
 
* इस दिन लोग विशेष रूप से पितृ तर्पण (श्राद्ध) करते हैं।
* पितरों की शांति के लिए व्रत, स्नान और पूजा अर्चना करते हैं।
* तर्पण का कार्य करने के लिए लोग घरों में विशेष पूजा सामग्री का उपयोग करते हैं।
* कुछ लोग पवित्र नदियों में स्नान करने जाते हैं, जैसे कि कावेरी या गोदावरी नदी।
* कुछ स्थानों पर विशेष यज्ञ और हवन भी होते हैं।
 
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