Daily Horoscope
✕

Kartik Poornima katha : आप नहीं जानते होंगे भगवान शिव को क्यों कहा जाता है त्रिपुरारी, पढ़ें पौराणिक कथा

Updated: सोमवार, 11 नवंबर 2019 (16:22 IST)
पौराणिक कथा के मुताबिक तारकासुर नाम का एक राक्षस था। उसके तीन पुत्र थे - तारकक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली...भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया।

अपने पिता की हत्या की खबर सुन तीनों पुत्र बहुत दुखी हुए।  तीनों ने मिलकर ब्रह्माजी से वरदान मांगने के लिए घोर तपस्या की। ब्रह्माजी तीनों की तपस्या से प्रसन्न हुए और बोले कि मांगों क्या वरदान मांगना चाहते हो। तीनों ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने को कहा। 
 
तीनों ने मिलकर फिर सोचा और इस बार ब्रह्माजी से तीन अलग नगरों का निर्माण करवाने के लिए कहा, जिसमें सभी बैठकर सारी पृथ्वी और आकाश में घूमा जा सके। एक हज़ार साल बाद जब हम मिलें और हम तीनों के नगर मिलकर एक हो जाएं, और जो देवता तीनों नगरों को एक ही बाण से नष्ट करने की क्षमता रखता हो, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया। 
 
तीनों वरदान पाकर बहुत खुश हुए। ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया। तारकक्ष के लिए सोने का, कमला के लिए चांदी का और विद्युन्माली के लिए लोहे का नगर बनाया गया। तीनों ने मिलकर तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया। इंद्र देवता इन तीनों राक्षसों से भयभीत हुए और भगवान शंकर की शरण में गए। इंद्र की बात सुन भगवान शिव ने इन दानवों का नाश करने के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया।  
 
इस दिव्य रथ की हर एक चीज़ देवताओं से बनी। चंद्रमा और सूर्य से पहिए बने। इंद्र, वरुण, यम और कुबेर रथ के चाल घोड़े बने। हिमालय धनुष बने और शेषनाग प्रत्यंचा बने। भगवान शिव खुद बाण बने और बाण की नोक बने अग्निदेव। इस दिव्य रथ पर सवार हुए खुद भगवान शिव। 
 
भगवानों से बनें इस रथ और तीनों भाइयों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जैसे ही ये तीनों रथ एक सीध में आए, भगवान शिव ने बाण छोड़ तीनों का नाश कर दिया। इसी वध के बाद भगवान शिव को त्रिपुरारी कहा जाने लगा। यह वध कार्तिक मास की पूर्णिमा को हुआ, इसीलिए इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाने लगा।

ALSO READ: कार्तिक पूर्णिमा कब है: अंतिम अवसर है मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का, कर लें 7 सटीक उपाय

Show comments

सभी देखें

भविष्‍य मालिका की भविष्‍यवाणी: मोदी या योगी कौन होगा भारत का अंतिम प्रधानमंत्री?

05 November Birthday: आपको 5 नवंबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज 05 नवंबर, 2026 का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का भविष्यफल

दीपावली की रात इन संकेतों को माना जाता है मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक

दीपावली पर कैसे शुरू हुई रंगोली बनाने की परंपरा? जानिए इसका धार्मिक महत्व

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 05 नवंबर 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

दीपावली पर क्यों होती है मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा? जानिए पौराणिक मान्यताएं

भाई दूज पर क्यों की जाती है यमराज की पूजा? जानिए इसकी रोचक धार्मिक परंपरा

दिवाली के पहले धनतेरस पर बनाएं कुबेर-लक्ष्मी 'धन वर्षा पोटली': वर्षभर घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

Diwali Puja Rules: दिवाली पूजा में लक्ष्मी जी की आरती करें या नहीं? जानें क्या कहते हैं ज्योतिष और शास्त्र

अगला लेख